तेलुगु, तमिल और मलयालम भाषाओं के साहित्य में विशिष्ट स्थान बनाने वाले महान साहित्यकार और अनुवादक डॉ. एल. आर. स्वामी का पूरा नाम डॉ. लक्ष्मण अय्यर रामस्वामी था। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1944 को केरल राज्य के त्रिशूर में हुआ। उनकी माता का नाम टी. जी. राजम्माल और पिता का नाम टी. के. लक्ष्मण अय्यर था। उनका परिवार तमिलनाडु से केरल सीमा क्षेत्र में आकर बसा हुआ एक तमिल ब्राह्मण परिवार था। उन्होंने रसायन शास्त्र में एम.एससी., उसके बाद एम.बी.ए. और फिर पर्यावरण अध्ययन में डिप्लोमा किया। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने विशाखापट्टनम की कोरमंडल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में की और बाद में आंध्र पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड में कार्यरत रहे, जहां से वे सीनियर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए। एल. आर. स्वामी ने हाई स्कूल के दिनों में ही कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ और ‘मेघदूत’ के मलयालम अनुवाद कंठस्थ कर लिए थे। साथ ही उन्होंने मलयालम के कई प्रसिद्ध ग्रंथों का अध्ययन भी कम उम्र में ही पूरा कर लिया था। “श्रीकृष्ण चरितम्” नामक हजार श्लोकों वाले ग्रंथ को पढ़कर वे हर श्लोक का अर्थ समझा सकते थे, जिससे सभी आश्चर्यचकित हो जा...
वर्ल्ड लाफ्टर डे का इतिहास 1998 में शुरू हुआ। इसे भारत के मुंबई में डॉ. मदन कटारिया ने शुरू किया था, जो लाफ्टर योगा मूवमेंट के फाउंडर थे। यह मूवमेंट इस आइडिया से शुरू हुआ कि भले ही हंसी जानबूझकर शुरू होती है, लेकिन ग्रुप में यह नैचुरल और मज़ेदार हो जाती है। समय के साथ, लाफ्टर क्लब और पब्लिक सेलिब्रेशन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए हैं। आज, वर्ल्ड लाफ्टर डे बड़े पैमाने पर हंसी इकट्ठा करने, सोशल इवेंट्स, हेल्थ एक्टिविटीज़ और ऑनलाइन कैंपेन के ज़रिए मनाया जाता है जो लोगों को ज़्यादा बार हंसने के लिए बढ़ावा देते हैं। K.V.SHARMA EDITOR