सावन का बादल आसमान में काले बादल छाए, ठंडी हवा चली! बिजली ने रास्ता दिखाया, गरज के साथ गरजे! वन की माँ मानसून की बारिश के आने का इंतज़ार करती रही, और रिमझिम फुहारों के साथ, धरनी रोमांचित और खुश थी। खेतों में फसलें हरी थीं, और नदियाँ और झरने बह रहे थे! थके हुए दिल में खुशी लाकर, वो ज़िंदगी की प्यास बुझाने आया! डॉ. कमल बैद सोशल वर्कर और एग्जीक्यूटिव एडिटर विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम
जवानी की यादें जो सफेद बालों में धुंधली पड़ गई हैं, हिम्मत के वो निशान जो हवा के सामने टिके रहे हैं। भले ही तुम लाठी लेकर मदद मांगो, भले ही तुम्हारी नज़र धुंधली हो, कभी न खत्म होने वाले अनुभवों का खज़ाना उन आँखों में है जो तुम्हें ज़िंदगी की सच्चाई सिखाती हैं। जब तुम्हारे पाले हुए बच्चे पंख लगाकर उड़ गए हों, उन आँखों में जो दरवाज़े को देखती हैं, उम्मीद ज़िंदगी की एक कविता बन गई है। मुस्कुराहट के साथ अभिवादन का एक शब्द ही काफ़ी है, जिस तरह वे पूरे दिल से तुम्हें दुआ देते हैं, घर का पुल, समाज की नींव बुढ़ापा कोई कमज़ोरी नहीं है, यह अनुभवों की एक ज़बरदस्त खुशबू है! के.वी. शर्मा कॉपीराइटर और एडिटेड एडिटर विशाखा संदेशम। विशाखापत्तनम