विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों ने देश भर में विश्वविद्यालय से वैश्विक स्तर तक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दी हैं। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले जी.एम.सी. बालयोगी, वर्तमान राज्यपाल डॉ. कम्भमपति हरिबाबू, और राज्यसभा सदस्य फोफेसर यार्लगाड्डा लक्ष्मी प्रसाद जैसे नेता इस संस्थान के लिए गर्व का विषय हैं। इसके अलावा, कई वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों, डॉक्टरों और इंजीनियरों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश की सर्वोच्च नागरिक सेवाओं (IAS/IPS) में यहाँ के सैकड़ों छात्र चयनित होकर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। प्रमुख विभूतियाँ और उनका योगदान प्रोफेसर यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद: एक प्रतिष्ठित लेखक, शिक्षाविद् और राजनीतिज्ञ हैं, जिन्हें साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया गया । उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।वे हिंदी व तेलुगु भाषाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। वर्तम...
लाडनूं । सुधर्मा सभा में आचार्य महाश्रमण ने अपने 65वें जन्मोत्सव पर पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न हो सकता है कि जन्म क्यों होता है? एक दिन में कितने बच्चों का तो कितने पशुओं का और भी कितने-कितने प्राणियों का जन्म होता होगा। जन्म के संदर्भ में कहा गया है कि प्रमादी जीव बार-बार जन्म लेता है, गर्भ में आता है। आदमी के भीतर चार कषाय होते हैं- क्रोध, मान, माया और लोभ। इन कषायों की प्रबलता के कारण अगले जन्म के मूल का अभिसिंचन किया करते हैं। जन्म को भी दुःख कहा गया है, लेकिन मानव जीवन मिलना भी मानों महत्त्वपूर्ण है। मानव जन्म लिए बिना जन्म-मरण से मुक्ति नहीं मिल सकती, इसलिए मानव जन्म का अपना महत्त्व है। जन्म लेना भाग्य की बात होती है, लेकिन पुरुषार्थ करना अपने हाथ की बात होती है। आदमी को यह सोचना चाहिए कि जन्म तो लाडनूं। आचार्य महाश्रमण के जन्मोत्सव पर गीतिका प्रस्तुत करते हुए कार्यकर्ता भाग्य से मिल गया, लेकिन अब मुझे सत्युरुषार्थ करना चाहिए। वह मानव मानो धन्य होता है तो अपने जीवन में सत्पुरुषार्थ करता है, शुभ योगों की प्रवृत्ति में रहता है और अपनी आत्मा के कल्याण का प्रयास करता ...