विशाखापत्तनम :इंसान की ज़िंदगी में कई स्टेज आते हैं: बचपन, जवानी, अधेड़ उम्र और बुढ़ापा। हर स्टेज की अपनी खासियत और खूबसूरती होती है। हालांकि, कई लोग बुढ़ापे को बोझ और कमज़ोरी की निशानी मानते हैं। लेकिन असल में, बुढ़ापा एक वरदान है। क्योंकि हर किसी को उस स्टेज तक पहुंचने का मौका नहीं मिलता। सफेद बाल, झुर्रियों वाली स्किन, धीमे कदम, हर साल आने वाले बर्थडे—ये सब सिर्फ़ बूढ़े होने की निशानी नहीं हैं। ये इस बात की निशानी हैं कि हमने ज़िंदगी में बहुत लंबा सफ़र तय किया है और समय ने हमें एक और साल तोहफ़े में दिया है। हर झुर्री के पीछे एक तजुर्बा होता है। हर सफेद बाल के पीछे ज़िंदगी में हमारे सामने आई कई घटनाएं, खुशियां और दुख होते हैं। बहुत से लोग ज़िंदगी में आगे बढ़ते हैं, उनके कई सपने होते हैं और वे उनके लिए कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं होता कि बुढ़ापा तक पहुंच सके। कुछ लोगों का सफ़र बीच में ही खत्म हो जाता है। इसलिए हमें मिलने वाला हर साल कीमती होता है। बूढ़े होने की शिकायत करने के बजाय, हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि हमें एक और साल जीने का मौका मिला है। बुढ़ापे...
दिनांक 24 अगस्त 2026 वैश्विक मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार विरोधी उपभोक्ता संरक्षण परिषद भारत ट्रस्ट एनजीओ दर्पण पोर्टल (नीति आयोग, भारत सरकार) द्वारा मान्यता प्राप्त डॉ. शैलेष वाणिया 'शैल' खंभोलज साहित्य संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनकी असाधारण प्रतिबद्धता, निस्वार्थ सेवा, उत्कृष्ट योगदान के लिए गर्व और सम्मान के साथ वैश्विक मानवीय सेवा उत्कृष्टता पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। । आपने मानव जाति की भलाई के लिए अपना समय, ज्ञान, संसाधन और करुणा समर्पित की है: हम शांति, न्याय, करुणा, मानवाधिकारों, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास पर आधारित विश्व के निर्माण में आपके बहुमूल्य योगदान को गर्व से स्वीकार करते हैं। आपकी प्रेरक सेवा जीवन को छूती रहे, जीवन बचाती रहे, समुदायों को एकजुट करती रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर, सुरक्षित और अधिक शांतिपूर्ण दुनिया का निर्माण करती रहे।शुभकामनाएं डॉ गुलाबचंद पटेल, गुजरात K.V.SHARMA EDITOR