Skip to main content

Posts

Showing posts from July, 2025

कहीं जन्म लिया...

                      के.वी.शर्मा, संपादक, कहीं जन्म लिया... कहीं यात्रा की... आखिरकार तुम यहाँ पहुँच गए। इस यात्रा पर अनजाने तुम जीवन का सत्य जानने से पहले ही खत्म हो गए। तुम्हारी ताकत कहाँ है? तुम्हारा परिवार कहाँ है? तुम्हारी पत्नी/पति, बच्चे कहाँ हैं? तुम्हारे माता/पिता कहाँ हैं? तुम्हारे दोस्त कहाँ हैं? तुम्हारा पैसा, गहने, संपत्ति कहाँ है? तुम्हारा प्यार, उम्मीदें, विचार कहाँ हैं? कितने अपमान, धोखे? कितने अधूरे सपने? कोई शिक्षा तुम्हें पसंद नहीं। कोई नौकरी तुम्हें पसंद नहीं। कोई जीवन तुम्हें पसंद नहीं। हमेशा यह कहते हुए भागते रहते हो कि तुम्हें कुछ और चाहिए, कुछ और करना है। वह अच्छा कर रहा है, यह खुश है, और तुम दूसरे के जीवन की चिंता करते हो। लेकिन तुम अपना जीवन जीना भूल जाते हो। अंत में, तुम्हें चिता तक ले जाने के लिए चार लोगों के अलावा कोई नहीं होगा। अभी भी... अपना अहंकार छोड़ दो। अगर तुम ये भी देख लोगे, तो तुम बदल जाओगे। मृत्यु और जन्म सत्य हैं। बाकी सब तो बस सत्य की यादें हैं... बस।

"आज़ादी से जियो और सपने देखो"

                      (के.वी.शर्मा विशाखापत्तनम) जब खुशी का संकेत मिलता है तो कुछ भी मायने नहीं रखता, न पर्यावरण, न शांति, न परिवार, न भूख, न मौत, कुछ भी नहीं... शायद यह हो सकता है कि आप भाग्यशाली हैं कि आपके पास सपने हैं... कल के बीज जीने के लिए, सपने देखने के लिए, आज़ादी से जीवन जीने के लिए बनते हैं सपने दिन को झुलसाने वाली सूरज की किरणों और किसी की इच्छा को छानते हैं... जीवन का पसीना आपकी छाती पर उतरता है और राख से राख, धूल से धूल में उड़ जाता है... आज़ादी से जियो और सपने देखो।

कविता संग्रह

     ". बरसात की रात"  आसमान पर छा गया बादल,  वर्षा  को   साथ    में   लाया,  छम   छम   कर   गिर   रही,   बारिश   की ढेर    सारी  बंदे,  कितना  सुहावना  मौसम  है,  मंद  पवन से  चल  रही हवा,  आकाश    से   गिर   रहा  है,  टीम  टीम     जल की   बूंदे,  आ गया है सावन का महीना,  साथ  में लाया  बरसात  को,  पेड़ पौधों को मिला नया जीवन,  खेतों  में  फसल  लहरा  रहे  हैं,  यह    है    बारिश   की     बूंदे,  क्यों    शोर    मचा  रहा    है,  इतना   निर्मल   है      मौसम,  कितना   शीतल   लग रहा है,  पंजे   की  पायल  कहत...