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ट्रांसफर स्टार..ट्रांसफर उनकी देन है..*18 साल में 30 बार.. ईमानदारी जिसने सिस्टम को हिला दिया..*
*'ट्रांसफर' खाकी के कमिटमेंट का टेस्ट है..*
*अटूट मर्दानगी.. अडिग श्रीराम..*
*समझौता करो तो कुर्सी मिलती है.. धर्म के लिए खड़े हो तो ट्रांसफर मिलता है..ये है ऑफिसर श्रीराम का राज..*
*सिस्टम से जंग.. 30 बार ट्रांसफर*
कुछ ऑफिसर एक जगह की बुराई करने के लिए सालों तक नेताओं के चक्कर लगाते हैं। लेकिन, जब वो श्रीराम का नाम सुनते हैं तो खुद सिस्टम डर जाता है। क्योंकि समझौता शब्द की उनकी डिक्शनरी में कोई जगह नहीं है। 18 साल की लंबी पुलिस सर्विस में 30 बार ट्रांसफर होना इंडियन पुलिस के इतिहास में एक अनोखी और हैरान करने वाली बात है..
श्रीराम, जिन्होंने 2007 में मुडिगुब्बा में SI के तौर पर अपना करियर शुरू किया था, जहां भी पैर रखते थे, कानून की रक्षा करना अपना फर्ज समझते थे। पॉलिटिकल दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए, उनका गुनाह गैर-कानूनी कामों को रोकना था.. इसीलिए उनके करियर में ऐसे भी मौके आए जब सिर्फ़ 40 दिनों में उनका ट्रांसफर कर दिया गया. कंदुकुर, पुट्टपर्थी, रायदुर्गम, और हाल ही में प्रोड्डातुर.. शहर ऐसे ही बदलते रहे, लेकिन उनके खाकी ड्रेस की वैल्यू कम नहीं हुई.

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