अचानक फेल होने लगीं किडनियां, मच गया हाहाकार
यह पूरा खौफनाक मामला फरवरी के मध्य में तब शुरू हुआ, जब लालचेरुवु के कुछ हिस्सों में सप्लाई किए गए दूध को पीने के बाद कई ग्राहक अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ने लगे। मरीजों को अचानक उल्टियां होने लगीं, पेट में असहनीय दर्द उठा और पेशाब आना बंद हो गया। सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह थी कि मरीजों की किडनियां अचानक काम करना बंद कर रही थीं। 22 फरवरी को जब चौदेश्वरननगर और स्वरूपनगर इलाकों से किडनी फेल होने के एक साथ कई मामले सामने आए, तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने आनन-फानन में एक बड़ी महामारी की जांच शुरू कर दी।
दूध में मिला था ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ का जहर, 100 परिवारों में हो रही थी सप्लाई
रविवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जब प्रयोगशाला में इस जानलेवा दूध की जांच की गई तो नतीजे देखकर अधिकारियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दूध में ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ नाम का एक बेहद खतरनाक जहरीला केमिकल मिला हुआ था। इसी जहरीले केमिकल वाले दूध को पीने के कारण पीड़ितों की किडनियां फेल हुईं और शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे 16 लोगों की जान चली गई।
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कोरुकोंडा मंडल के नरसपुरम गांव में स्थित एक डेयरी यूनिट से इलाके के 100 से अधिक परिवारों को इस जानलेवा दूध की सप्लाई की जा रही थी। शक के घेरे में आने के बाद इस डेयरी यूनिट से सप्लाई को तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 16 फरवरी से 21 मार्च के बीच कुल 20 लोगों को गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इनमें से 16 लोग मौत के मुंह में समा गए, तीन का इलाज अभी भी जारी है, जबकि केवल एक व्यक्ति ही ठीक होकर अपने घर लौट पाया है।

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