सब्र और हिम्मत के आगे,
कोई नहीं जीत सकता।
प्यार से भरा एक समंदर था।
कोई नहीं जीत सकता।
शक्ति रहे भरमार अगर तो,
मंजिल तक पहुँच ही जाएगा।
नाम अच्छा हो तो,
साहिल पर ज़रूर पहुँच जाएगा।
बांका जिसका बच्चा दुनिया में है
समय का उल्टा क्या हो सकता है।
सब्र और हिम्मत के आगे,
कोई नहीं जीत सकता।
दुनिया की हर मुश्किल को पार कर जाए,
मात नहीं हरजीज खाता
मैदान में, वो अड़ जाता है
वो जंग का दुश्मन है।
उस दुश्मन की मदद के बिना,
कोई आकर मुझसे मिल सकता है।
सब्र और हिम्मत के आगे,
कोई नहीं जीत सकता।
के.वी.शर्मा,
संपादक,
( विशाखापत्तनम दर्पण समाचार)

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