उन्होंने कहा कि सुनने में कमी का देर से पता चलने पर बोलने के विकास, सीखने, इमोशनल हालत और सोशल स्किल्स पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। उन्होंने सलाह दी कि बुलाने पर कोई जवाब न देना, बोलने में लड़खड़ाना और अजीब तरह से चुप रहना जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
मेडिकल स्टडीज़ से पता चलता है कि हर 1,000 बच्चों में से 1-3 को सुनने में कमी हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज़िंदगी के पहले छह महीने भाषा के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। नए जन्मे बच्चों पर किए जाने वाले OAE और BERA टेस्ट आसान, दर्द रहित और भरोसेमंद होते हैं।
शुरुआती पहचान और इलाज, हियरिंग एड्स, कॉक्लियर इम्प्लांट्स और स्पीच थेरेपी बच्चे के एजुकेशनल और सोशल विकास को बेहतर बना सकते हैं। मेडिकवर हॉस्पिटल्स ने हर बच्चे के लिए हियरिंग स्क्रीनिंग ज़रूरी करने की मांग की है।

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