कुल 82.98 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना तीन साल की अवधि (2025-26, 2026-27 और 2027-28) में पूरी की जाएगी। इस ड्रेजिंग कार्यक्रम के तहत हर साल 2.50 लाख क्यूबिक मीटर गाद (silt) हटाने का लक्ष्य रखा गया है, और इस निकाली गई सामग्री को पंप के ज़रिए तट पर पहुँचाया जाएगा। हर साल की ड्रेजिंग गतिविधि के लिए 45 कार्य दिवस (मौसम अनुकूल होने पर) निर्धारित किए गए हैं।
तीन साल की इस अवधि में से पहले साल (2025-26) के लिए ड्रेजिंग का काम 10 मार्च 2026 को शुरू हुआ, जिसमें ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज़ "DREDGE XXI" को तैनात किया गया।
VPA और DCIL के अध्यक्ष (चेयरपर्सन), डॉ. मधैयान अंगमुथु (IAS) ने बताया कि विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी, आउटर हार्बर में स्थित सैंड ट्रैप से उपलब्ध रेत का उपयोग करके रामा कृष्णा बीच का नियमित रूप से पोषण कर, तट के कटाव को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक प्रारंभिक प्रक्रिया है और R K बीच को सुरक्षित रखने तथा उसका पोषण करने के लिए अत्यंत आवश्यक है; साथ ही, विशाख शहर के इस सुंदर और स्वच्छ बीच की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर भी काम किया जा रहा है।

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