मेडिकवर हॉस्पिटल्स विमेंस हॉस्पिटल में हुई यह घटना मेडिकल फील्ड में कमिटमेंट, टाइमलाइन और टीमवर्क की अहमियत को साफ तौर पर दिखाती है। हर्षित नाम के एक 11 महीने के बच्चे को इमरजेंसी डिपार्टमेंट में लाया गया, जिसमें गंभीर सेप्टिक शॉक, पेट में सूजन और उल्टी जैसे जानलेवा लक्षण थे। क्योंकि तब तक बच्चे की हालत बहुत क्रिटिकल थी, इसलिए उसे तुरंत इमरजेंसी रूम में इंट्यूबेट किया गया और उसके एयरवे को सिक्योर किया गया। IV फ्लूइड्स और इनोट्रोप्स की मदद से सर्कुलेशन को स्टेबल करने की कोशिश की गई।
मेडिकल टेस्ट में गंभीर सेप्सिस के साथ-साथ शॉक, एक्यूट किडनी इंजरी (AKI), इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस और निमोनिया जैसी कई कॉम्प्लीकेशंस का पता चला। बच्चे की हालत स्टेबल होने के बाद, जेनेटिक बैंड्स की वजह से आंतों में रुकावट को हटाने के लिए एक इमरजेंसी सर्जरी की गई, जो असल वजह थी। यह सर्जरी कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. अनीता त्रिपाठी की लीडरशिप में, डॉ. विजया कृष्णा और ICU टीम के कोऑर्डिनेशन में सक्सेसफुली की गई।
सर्जरी के बाद भी सिचुएशन चैलेंजिंग बनी रही। बच्चे को सेप्सिस, शॉक, निमोनिया, पल्मोनरी एम्बोलिज्म, प्ल्यूरल इफ्यूजन, एनीमिया, फंगल सेप्सिस और ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें थीं। हालांकि, डॉक्टरों की लगातार मॉनिटरिंग, सही इलाज और ICU केयर से बच्चा धीरे-धीरे ठीक हो गया।
यह घटना मेडिकल टीम की लगन, टेक्निकल एक्सपर्टीज़ और टीमवर्क की वजह से किसी बच्चे की जान बचने का एक बहुत कम होने वाला उदाहरण है। यह सच में एक शानदार रेस्क्यू स्टोरी है।
K.V.SHARMA EDITOR

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