यह जिंदगी कुछ समय के लिए,
कहीं आत्मीयता को भावना को छोड़कर,
टकराव की भावनाओं के साथ,
सच्चे मन से प्यार करो तो,
भगवान की दुआ मिलेगी,
कहानी बनेगी परस्पर रिश्ते भी,
कभी-कभी वह अपना बन जाता है,
जब आपसी भावनाएं दुर्लभ होगी,
रिश्ते भी खतरे में पड़ेंगे,
जैसा तेरा स्वभाव है,
उसे बदलने की कोशिश करो,
स्वार्थ की जिंदगी छोड़कर,
प्यार भरा जीवन को अपनाओ,
यह मन कहता है कि,
तुझे देवी बनाकर पूजा करें,
लेकिन समय का साथ रहना ही,
जीवन का आनंदमय में रहस्य है,
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"जीवन"
जीवन एक बहती धारा जैसी है,
बहना है प्रकृति का नियम,
इसे निरंतर बहने दो,
जब बहना बंद होता तो,
मुश्किलें अपने आप आती है,
पर कभी-कभी बहाव को,
रोक पाना भी मुश्किल है,
जीवन भी एक कविता के जैसा,
जो निर्मित है पांच भूतों से,
अनुभव ही भौतिक संसार का,
सुबह तक ही रात है,
शाम तक का दिन,
कभी भरा हुआ हाथ था,
कभी हाथ भी खाली था,
के. वी. शर्मा,
लेखक,
संपादक

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