आंध्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आज विभाग परिसर में शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है।
कार्यक्रम में विभाग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भाषण, निबंध, कविता-पाठ आदि विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस अवसर पर लगभग 100 विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि जागृत करना तथा उनकी रचनात्मक क्षमता का विकास करना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रभावशाली परिचय दिया।
विभाग के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से शिक्षकगण ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों से आए अतिथियों एवं विद्यार्थियों के स्वागत तथा समुचित व्यवस्था में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम में पद्म भूषण आचार्य लक्ष्मीप्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में भारतीय पुस्तक समिति के अध्यक्ष ज़र्रा अप्पाराव तथा अन्य अतिथियों में डॉ. कृष्ण बाबू, डॉ. शांति,डॉ. पी.के. जयालक्ष्मी और डॉ .राजशेखर उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में सन, प्रिजम, गायत्री विद्या परिषद, कृष्णा गवर्नमेंट महाविद्यालय, बी.वी.के., बुल्लय्या आदि महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण ने भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर प्रो. वाई. एल. पी. ने हिंदी विभाग के इतिहास एवं उसकी गौरवगाथा पर प्रेरणादायक भाषण दिया, जिसने विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रेरित किया।
हिंदी भाषा के विकास एवं प्रसार के लिए इस प्रकार के आयोजनों की महत्ता पर बल देते हुए अंत में कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


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