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आंध्र विश्वविद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र, वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने का लक्ष्य, वीसी जी.पी. राजशेखर


 विशाखापट्टनम में आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम में कुलपति जी.पी. राजशेखर ने कहा कि विश्वविद्यालय सीखने का प्रमुख केंद्र और उच्च मानकों की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि 1926 में स्थापित यह संस्थान आज अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश करते हुए हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों के योगदान का उत्सव गना रहा है। उन्होंने उद्योगों, अनुराधान संस्थानों और अतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ हुए एमओयू साझेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सहयोग विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब अपने दूसरे शताब्दी की ओर वैश्विक दृष्टिकोण के साथ कदम बढ़ा रहा है। वीसी ने कहा कि अगले दशक में आंध्र विश्वविद्यालय को एशिया के अग्रणी शोध संस्थानों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शोध प्रकाशनों को तीन गुना बढ़ाने और विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त अनुसंधान को विस्तार देने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि 'शताब्दी मास्टर प्लान के तहत आधुनिक छात्रावास, केंद्रीकृत भोजन व्यवस्था और खेल सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। साथ ही सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी और हाई- परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे है, जिससे शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा नवाचार और उद्योग के समन्वय के लिए 'सेंट्रल रिसर्च पार्क भी विकसित किया जा रहा है। वीसी ने कहा कि क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायो- फार्मा, मेट्रोलॉजी, मरीन साइसेज और जियो-स्पेशियल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तटीय शहर की जरूरतों के अनुरूप फार्मा, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों के साथ भी तालमेल बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मजबूत नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है और हर निर्णय में विश्वविद्यालय पहले के सिद्धांत को अपनाया जा रहा है। साथ ही वैश्विक एंडोमेंट और नॉलेज नेटवर्क विकसित कर संस्थान के तेज विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में अब्दुल नजीर, एम. वेंकैया नायडू, के. राममोहन नायडू, सचिन तेंदुलकर, के. हरिबाबू, भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा, पेग्मशानी चंद्रशेखर, ग्रंथी मल्लिकार्जुन राव, बीवीआर मोहन रेड्डी, जीपी राजशेखर और त्रिविक्रम श्रीनिवास सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुई।

                   K.V.SHARMA EDITOR 

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