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कैसे जिएं?

 


वेद हमें बताते हैं कि इंसान को कैसे जीना चाहिए। वेद कहते हैं कि अगर कोई इंसान अच्छा दिखता है, अच्छा सुनता है, अच्छा बोलता है और किसी पर निर्भर नहीं रहता, तो वह सौ साल तक जिएगा।

किसी का धन नहीं चुराना चाहिए। यानी पैसा कमाना एक पुण्य होना चाहिए। इसके अलावा, वेद सिखाते हैं कि बिना नफरत वाला प्यार भरा समाज अच्छा होता है।

उपनिषदों में एक कहावत है। हमेशा कुछ अच्छा सुनना चाहिए। पढ़ते रहना चाहिए। जो पढ़ा है उस पर मनन करते रहना चाहिए।

चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, सच का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। नैतिक रूप से गिरना नहीं चाहिए। 'मैं, मेरा' की छोटी सोच को छोड़ देना चाहिए। अगर कोई यह सोचे कि करने वाला और बनाने वाला भगवान है, तो फल की कोई इच्छा नहीं रहती।

कौरवों ने 'हम, हमें, मेरा' के स्वार्थ को जीवन में पहला स्थान दिया। उन्होंने दुनिया को दूसरा और भगवान को तीसरा स्थान दिया। नतीजा सबको पता है।

पांडवों ने अपनी ज़िंदगी में भगवान को पहली जगह दी। उन्होंने बिना स्वार्थ के दुनिया को दूसरी जगह दी। फिर उन्होंने अपने बारे में सोचा। इसीलिए वे भारतीय युद्ध में विजेता बने।

किसी भी इंसान को अपनी ज़िंदगी में भगवान को पहली जगह देनी चाहिए। स्वार्थ को भूलकर भलाई के लिए त्याग करना चाहिए। सबसे बढ़कर, उन्हें अपने बारे में सोचना चाहिए। तभी ज़िंदगी खुशहाल होगी।

हर इंसान को दुनिया में अपनी पहचान बनानी चाहिए और भीड़ में शामिल नहीं होना चाहिए।

मूल्यों से भरी ज़िंदगी जीकर और सही रास्ते पर चलकर ही इंसान अपने लक्ष्य को पा सकता है।

इस देश में पैदा हुए कई अच्छे शिक्षकों ने इंसान की सेवा को भगवान की सेवा माना। वे भलाई को अपना लक्ष्य मानकर जीते थे। उन्होंने विनम्रता से दान-पुण्य किया। लोग ऋषियों जैसे बन गए। उन्होंने समाज सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया। सिद्धार्थ बुद्ध बन गए। मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा बन गए।

शंकराचार्य, जो कालड़ी से हिमालय तक पैदल चले और ईमानदारी से धर्म का प्रचार किया, दुनिया के गुरु बन गए।

वे सभी समाज की भलाई के लिए अपनी जान देकर यादगार बन गए हैं।

कोई भी काम तभी पूरा हो सकता है जब आप मेहनत करें। अगर आप बैठकर सपने देखेंगे, तो आप ज़रा सी भी तरक्की नहीं कर पाएंगे।

जब तक शेर का मुंह खुला रहता है, तब तक जंगली जानवर उसके मुंह तक नहीं पहुंच सकता! दुनिया हमारी सोच के हिसाब से चलती है। जब हमारी नज़र अच्छी होती है, तो दुनिया अच्छी लगती है। जब हम बुरी नज़र से देखते हैं, तो दुनिया बुरी लगती है। दूसरों का भला न करना बेहतर है, लेकिन उन्हें नुकसान न पहुंचाना भी।

अगर हम प्यार से बात करें, तो दुश्मन भी धीरे-धीरे दोस्त बन जाते हैं। हर इंसान को समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए। हमें नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए और न्याय के रास्ते पर चलना चाहिए। हमें सबके साथ प्यार और ज्ञान बांटना चाहिए। तब इंसान इंसान बनता है। भगवान उसमें बसते हैं! ऐसी धन्य आत्माएं धरती को खुशियों की जगह और आनंद की जगह बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं जहां संत विचरण कर सकें। *सभी भगवान कृष्ण की पूजा करें*

                           के.वी.शर्मा, 

                            संपादक,

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