बारीकियों से बने घोंसले
पल भर में खूबसूरत मूर्तियां बन सकते हैं
लेकिन वे लहरों के आंसुओं में
पिघलकर मुस्कुराते हुए रेत के टीले बनकर रह जाएंगे।
आसमान में खूबसूरती और
शान से उड़ती पतंग बहुत अच्छी लगती है।
लेकिन जो हाथ धागे को पकड़कर हिलाता है
, वह उसे डगमगाने नहीं देता।
बिजली के करंट का त्रिशूल
आसमान में अटक जाएगा
न नीचे आएगा, न ऊपर जाएगा।
तब कई भाषाओं में सीखे
शब्द खामोश रह जाएंगे।
तब कई कलाबाजियां किए गए
कदम लड़खड़ा जाएंगे।
तब, अगर वह खूबसूरत भी था,
तो एक बेजान मूर्ति की तरह,
कई रंगों का मेल भी पागल
कविताओं की तस्वीर बनकर रह जाएगा।
तब, गूंगा मन ब्लॉक हो जाएगा
और बेमतलब की भावनाओं की तरह
एक गड़बड़ बनकर रह जाएगा
जिसे समझा नहीं जा सकता।
तब, जब भी, हमेशा के लिए
के.वी.शर्मा,
संपादक,

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