वि.सा. 1971 एवं हिंदी साहित्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में
हिंदी अनुवाद ग्रंथ “आख़िर कब तक?” का लोकार्पण समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया।
सहृदय साहित्यि के अध्यक्ष शेखरमंत्री प्रभाकर राव की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में
मुख्य अतिथि के रूप में कलारत्न पुरस्कार प्राप्त, प्रख्यात साहित्यकार
डॉ. दामेरा वेंकट सूर्यराव उपस्थित हुए।
उन्होंने 1970 के दशक में श्री मल्लाप्रगडा रामाराव द्वारा रचित तेलुगु कहानी संग्रह“गोरंत दीपम” के हिंदी अनुवाद “आख़िर कब तक?” (अनुवाद:
डॉ. पी. के. जयलक्ष्मी, प्रो, सेंट जोसेफ कॉलेज, पूर्व हिंदी आचार्य) का लोकार्पण करते हुए
कहानियों का परिचय कराया।
मूल लेखक श्री मल्लाप्रगडा रामाराव ने अपनी कहानियों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय उद्बोधन में शेखरमंत्री प्रभाकर राव ने अनुवाद साहित्य की आवश्यकता पर बल दिया।
हिंदी साहित्य भारती के गौरवाध्यक्ष डॉ. एस. कृष्ण बाबू ने ग्रंथ की समीक्षात्मक चर्चा करते हुएअनुवाद की विशिष्टता को रेखांकित किया। उन्होंने डॉ. पी. के. जयलक्ष्मी की अनुवाद शैली को
सरल, सुस्पष्ट एवं भावपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मूल तेलुगु कृति के भाव और गरिमा को
सफलतापूर्वक हिंदी में प्रस्तुत करती है।
इसके पश्चात् अनुवादिका डॉ. पी. के. जयलक्ष्मी ने अपने वक्तव्य में कहा कि उन्होंने मूल कृति के भावों को यथावत प्रस्तुत करने का प्रयास किया है तथा आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक हिंदी पाठकों के निकट पहुंचेगी।कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया।वि.सा. 1971 के सह-निर्वाहक श्री आडारी गणेश्वर राव के स्वागत भाषण से प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम
श्री घंडिकोटा विश्वनाथम् के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. राजशेखर, राधाराणी, पृथ्वीला सहित सेंट जोसेफ कॉलेज के विद्यार्थी एवं
साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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