लाडनूं । सुधर्मा सभा में आचार्य महाश्रमण ने अपने 65वें जन्मोत्सव पर पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न हो सकता है कि जन्म क्यों होता है? एक दिन में कितने बच्चों का तो कितने पशुओं का और भी कितने-कितने प्राणियों का जन्म होता होगा। जन्म के संदर्भ में कहा गया है कि प्रमादी जीव बार-बार जन्म लेता है, गर्भ में आता है। आदमी के भीतर चार कषाय होते हैं- क्रोध, मान, माया और लोभ।
इन कषायों की प्रबलता के कारण अगले जन्म के मूल का अभिसिंचन किया करते हैं। जन्म को भी दुःख कहा गया है, लेकिन मानव जीवन मिलना भी मानों महत्त्वपूर्ण है। मानव जन्म लिए बिना जन्म-मरण से मुक्ति नहीं मिल सकती, इसलिए मानव जन्म का अपना महत्त्व है। जन्म लेना भाग्य की बात होती है, लेकिन पुरुषार्थ करना अपने हाथ की बात होती है। आदमी को यह सोचना चाहिए कि जन्म तो
लाडनूं। आचार्य महाश्रमण के जन्मोत्सव पर गीतिका प्रस्तुत करते हुए कार्यकर्ता भाग्य से मिल गया, लेकिन अब मुझे सत्युरुषार्थ करना चाहिए। वह मानव मानो धन्य होता है तो अपने जीवन में सत्पुरुषार्थ करता है, शुभ योगों की प्रवृत्ति में रहता है और अपनी आत्मा के कल्याण का प्रयास करता है। सांसारिक कार्यों का भी अपना मूल्य हो सकता है,
किन्तु अध्यात्म की दृष्टि से देखा जाए तो धर्म की साधना बहुत बड़ी पूंजी होती है। उन्होंने कहा कि आदमी को अपने आगे के विषयमें सोचने का प्रयास करना चाहिए। लोगों को अनुकूलता मिल जाए, यह तो पूर्वजन्म की कमाई की बात होती है, लेकिन अगला जन्म कितना अच्छा हो अथवा जन्म मरण के चक्र से मुक्ति मिले, इसका प्रयास करना चाहिए।
आचार्य ने आगे कहा कि तेरापंथ परिवार का मिल जाना बहुत सौभाग्य की बात है। आचार्यश्री भिक्षु के इस परिवार में करीब 52 वर्षों से रह रहा हूं। आचार्य ने इस अवसर पर साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का स्मरण करते हुए कहा कि इस योगक्षेम वर्ष के आयोजन में उनका भी निवेदन था और मैंने उनका निवेदन स्वीकार कर लिया था।
शासनमाता जैन विश्व भारती के मुख्य न्यासी जयंतीलाल सुराणा, जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्व भारती के न्यासी राजेश दुग्गड, वापी, ललितकुमार दूगड़, तेजकरण बोथरा, नरपत दूगड़, तेजकरण सुराणा, प्रभा दूगड़, योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, महामंत्री निर्मल कोटेचा, संपतराज डागा, संजय खटेड़, निर्मल नौलखा, सूरजमल नाहटा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में डॉ कमल सिंह बैद द्वारा प्रस्तुत गीतिका का कार्यकर्ताओं द्वारा संगान किया गया, जिसे श्रावकों ने खूब सराहा!
Dr Kamal baid ji Excutive EDITOR





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