उन्होंने लोगों की कितनी मदद की
, कितने दुख झेले, खुद कितना सीखा,
समझदार बने, और एक कमाल
के विज़न वाले इंसान बने,
यह उन्होंने बार-बार कहा
वे गरीबों, पीड़ितों और किसानों के दोस्त थे,
जिन्होंने उनके हक के लिए दिन-रात लड़ाई लड़ी,
और लड़कियों के लिए स्कूल खोले,
और पढ़ाई-लिखाई को सबके लिए खुला किया
उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ाया,
और उन्हें पहली महिला टीचर बनाया,
और वे समाज की महिला रक्षक बनीं
चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, वे डगमगाए नहीं
अपना बैग लो, अपनी किताब लो,
चलो स्कूल चलते हैं,
चलो अपनी किस्मत खुद बनाते हैं,
चलो इस देश को समझदार बनाते हैं
, मशहूर होते हैं, यही हमारी सच्ची सांस है
के.वी. शर्मा
की लिखी कविता,
एडिटर
विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी न्यूज़ पेपर और
विशाख संदेशम तेलुगु न्यूज़ पेपर
विशाखापत्तनम
आंध्र प्रदेश

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