K.V.Sharma EDITOR
भारतीय नौसेना कमांडरों का सम्मेलन 01/2026, 14 अप्रैल 2026 को नौसेना भवन में शुरू हुआ। इसका उद्घाटन भाषण नौसेना प्रमुख (CNS) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने दिया, जिसमें नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व, बाहर से आए ऑपरेशनल और एरिया कमांडरों, तथा कमांड मुख्यालय और नौसेना मुख्यालय के कर्मचारियों को संबोधित किया गया।
CNS ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की उपलब्धियों की सराहना की। इनमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, ऑपरेशन्स की गति बढ़ाना और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल (inter-service synergy) को बेहतर बनाना शामिल है। CNS ने युद्ध की तैयारी (combat readiness) पर लगातार ध्यान केंद्रित करने और 'भविष्य के लिए तैयार' (Future Ready) सेना बनाने हेतु उभरती हुई तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर दिया।
CNS ने उभरते हुए भू-रणनीतिक परिदृश्य में, हिंद महासागर क्षेत्र और उससे बाहर भी भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धताओं को दोहराया। उन्होंने बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यासों के माध्यम से 'मित्र देशों' (FFCs) के साथ सक्रिय जुड़ाव रखते हुए, एक एकजुट और विश्वसनीय दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
सम्मेलन के दौरान ऑपरेशनल मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई। इनमें तीनों सेनाओं के बीच तालमेल (jointness), क्षमता वृद्धि (समुद्र और ज़मीन दोनों पर), रखरखाव और मरम्मत (refits), बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा अभ्यास, प्रशिक्षण, विदेशी सहयोग, मानव संसाधन (HR) से जुड़े मुद्दे, तथा नवाचार और स्वदेशीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भी नौसेना कमांडरों को संबोधित किया और उनसे बातचीत की। उन्होंने बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़े मामलों पर चर्चा की, और नौसेना से आग्रह किया कि वे युद्ध के तेज़ी से बदलते स्वरूप—जिसमें आर्थिक और तकनीकी कारक भी शामिल हैं—के अनुरूप अपनी रणनीतियों की योजना बनाए।





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