Skip to main content

कविता संग्रह




     ". बरसात की रात"

 आसमान पर छा गया बादल,

 वर्षा  को   साथ    में   लाया,

 छम   छम   कर   गिर   रही,

  बारिश   की ढेर    सारी  बंदे,

 कितना  सुहावना  मौसम  है,

 मंद  पवन से  चल  रही हवा,

 आकाश    से   गिर   रहा  है,

 टीम  टीम     जल की   बूंदे,

 आ गया है सावन का महीना,

 साथ  में लाया  बरसात  को,

 पेड़ पौधों को मिला नया जीवन,

 खेतों  में  फसल  लहरा  रहे  हैं,

 यह    है    बारिश   की     बूंदे,

 क्यों    शोर    मचा  रहा    है,

 इतना   निर्मल   है      मौसम,

 कितना   शीतल   लग रहा है,

 पंजे   की  पायल  कहती है,

 उड़ते    बादलों   को  छूना है

 बहका   बहका    मौसम   है,

 चारों ओर  हरियाली छाई  है ,


 "आ गया सावन"

 आ गया सावन का महीना,

 मिलेगा हर समस्या से मुक्ति,

 आ  गया  है  शिव  जी का,

 पूजा पाठ करने का समय,

 करो    शिवजी   की  पूजा,

 बनेंगे शिवजी की कृपा पात्र,

 कितना मनोहर लग रहा है,

 यह  सावन   का    महीना,

 सावन का.   महीना    है,

 आ गया है रक्षाबंधन का,

 महत्वपूर्ण          त्यौहार,

 आकाश में काला बादल,

 पेड़  पौधे  झूम  रहे  हैं,

 नए   विकसित.   पत्ते,

 कोयल  की  कुहू कुहू

 सुंदर  आवाज मां को,

 वृक्ष प्रकृति का वरदान,

 पेड़    की   छाया   में,

 हमें  बड़ा    सुहावना,

 निराशा  को आशा में,

-

"समय का इंतजार"

 मनुष्य   का   तकदीर,

 तब      बदलता      है,

 जब.   सही  समय का,

 इंतजार       होता    है,

 समय      कभी     भी,

 हमारे लिए नहीं रुकता,

  बल्कि     हमें     इसका,

 इंतजार    करना   होगा,

 सपना    जितना    भी,

  बड़ा          होता     है,

 तकलीफें    उतना   ही,

 बढ़ता      रहता       है,

 हमारा    जीवन       ही,

 तकलीफों      के   साथ,

 जुड़ा          हुआ       है,

 हमें समय का इंतजार करना है,

 समय         कभी         भी,

 कमजोर       नहीं       होता,

 लेकिन हम  कमजोर हो रहे हैं,

 पर एक दिन कामयाबी मिलेगी,


 "जमाना बदल रहा"

 जमाना  तो   बदल  रहा है,

 लेकिन हम नहीं बदल रहे हैं,

 हम  पाल को भूल   जाते हैं,

 मगर  यादें हमें   सताती  है,

 कभी-कभी    नजदीकियां   बढ़ती,

 लेकिन न जाने समय का क्या होगा,

 हमें   समझ.  में कुछ   नहीं  आता,

 अब    समय   बदलने   लगा    है,

 आज          का         इंसान,

 शारीरिक    और    मानसिक,

 तनाव से गुजर रहा है जिंदगी,

 लेकिन  समय    बदल रहा  है,

 घर.   पर   रहते     हुए  भी,

 घर पर नहीं   मन      लगता,

 दफ्तर   में    होने   पर   भी,

 मन    तो   नहीं  लगता   है, ki

 जीवन     के    सच    को,

 समझने  का  प्रयास  करो,

 तभी   ही      जीवन     में,

 आगे         बढ़       सकेंगे,


- के वी शर्मा,

 विशाखापट्टनम,

 आंध्र प्रदेश,

Comments

Popular posts from this blog

स्वतंत्रता दिवस परेड में पूर्व सैनिकों ने बढ़ाया गौरव फुल ड्रेस रिहर्सल में 22 त्रि-सेवा पूर्व सैनिकों ने दिखाया अनुशासन और जज्बा |

.  Dr Raghawendra Mishra Excutive EDITOR   विशाखापत्तनम। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली परेड की तैयारियों के तहत पुलिस बैरक मैदान में फुल एवं फाइनल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया गया। रिहर्सल का निरीक्षण विशाखापत्तनम के पुलिस आयुक्त डॉ. शंखब्रत बागची, आईपीएस ने किया। रिहर्सल के दौरान 22 त्रि-सेवा पूर्व सैनिकों ने पूरे जोश, अनुशासन और उत्साह के साथ परेड में हिस्सा लिया। पूर्व सैनिकों की शानदार वेशभूषा, अनुशासित टर्नआउट और प्रभावशाली भागीदारी ने मैदान में मौजूद लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। परेड समाप्त होने के बाद पुलिस आयुक्त स्वयं अपनी टीम के साथ पूर्व सैनिकों की प्लाटून के पास पहुंचे और उनकी वेशभूषा, अनुशासन एवं शानदार प्रदर्शन की सराहना की। इस दौरान पुलिस आयुक्त और एक महिला आईपीएस अधिकारी ने पूर्व सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा— “आप लोगों के आने से परेड की शान बढ़ गई।” पुलिस अधिकारियों के इन उत्साहवर्धक शब्दों से पूर्व सैनिकों में खुशी और गर्व की भावना देखने को मिली। पूर्व सैनिकों ने कहा कि देशसेवा की भावना वर्दी उतरने के बाद भी समाप्त नहीं होती। राष्ट्र...

नगर के जाने-माने समाज सेवक एवं दानदाता डॉ कमल बैद जी को नेशनल मंडेला अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया!

विशाखापट्टनम: नगर के जाने-माने समाज सेवक दानदाता और गरीबों के मसीह कहलाने वाले डॉक्टर कमल बैदा जी को गोल्ड ईरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा नेशनल मंडेला अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया! यह पुरस्कार उनके प्रतिभा एवं गरीबों की सहायता को ध्यान में रखते हुए दिया गया है! मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं डॉ कमल जी को आगे और भी अधिक से अधिक पुरस्कारों के साथ सम्मानित किया जाना चाहिए!                              के ·वी· शर्मा                                संपादक