*_इसके बाद जो मिलता है वह है – आनंद की भावना। वह आनंद का ठिकाना ब्रह्मस्थान में है। इसीलिए भगवान सात पहाड़ियों पर मौजूद हैं।_*
*_तिरुमाला की सात पहाड़ियों के नाम_*
*_1. नीलाद्रि,_*
*_2. वृषभाद्रि,_*
*_3. गरुड़ाद्रि,_*
*_4. अंजनाद्रि,_*
*_5. शेषाद्रि,_*
*_6. वेंकटाद्रि,_*
*_7. नारायणाद्रि.._*
*_पुराण कहते हैं कि ये सात पहाड़ियाँ शालग्राम के रूप हैं, वे रूप जिनमें महर्षि ने खुद पहाड़ों के रूप में अवतार लिया था। ऐसा माना जाता है कि तिरुमाला में पेड़, झाड़ियाँ और पक्षी भी महर्षि के ही रूप हैं। इसीलिए तिरुमाला में पैदा होने वाली कोई भी चीज़ साधारण नहीं है।_*
*_श्लोक महिमा:_*
*_शास्त्रों में कहा गया है कि अगर आप इस जगह से जुड़े 20 नामों का जाप करते हैं, तो आप सभी पापों से मुक्त हो जाएँगे।_*
*_अंजनाद्रि वृषदृश्च शेषाद्रिर्गरुड़चलः…_*
*_वैकुंठाद्रि पुष्करद्रिः – इति नामनि विमसातिः_*
*_सात पहाड़ियों का मतलब:_*
1️⃣ *_नीलाद्रि:_*
*_इस पहाड़ी का नाम नीलांबरी के नाम पर रखा गया, जिन्होंने सबसे पहले भगवान को नीले फूल चढ़ाए थे।_*
_नीले फूलों का चढ़ावा = अहंकार का निकलना।_*
2️⃣ *_वृषभाद्रि:_*
*_बैल (बैल) वैदिक शपथ का प्रतीक है। वेदों को मानक मानने वाले ही इस पहाड़ पर चढ़ सकते हैं।_*
*_वृषभासुर की कहानी इस पहाड़ की महिमा दिखाती है।_*
3️⃣ *_गरुड़ाद्रि:_*
*_यह पहाड़ गरुड़ की तपस्या के नतीजे में बना था।_*
और*_गरुड़ाद्रि का मतलब है उपनिषदों के ज्ञान से भगवान को जानना।_*
4️⃣ *_अंजनाद्रि:_*
*_"अंजनम" का मतलब है आंख में चुभना।_*
*_आप जो कुछ भी देखते हैं उसमें ब्रह्म को देखना – यही अंजनाद्रि का सिद्धांत है।_*
*_हनुमान का जन्म अंजनादेवी की तपस्या के नतीजे में हुआ था।_*
5️⃣ *_शेषाद्रि:_*
*_अनुभव से यह जानने की स्थिति कि सब कुछ ब्रह्म है।_*
*_बिना राग, द्वेष और भय के समभाव। स्थिति।_*
*_मुख्य सात पहाड़ियों में से एक पहाड़ी – शेषाद्रि।_*
6️⃣ *_वेंकटाद्रि:_*
*_वेम = पाप | काटा = नष्ट करना.._*
*_भगवान की मौजूदगी में सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।_*
*_वह पवित्र पहाड़ी जहाँ कलियुग के भगवान प्रकट हुए थे। माधव की कहानी इस पहाड़ी की महिमा का सबूत है।_*
7️⃣ *_नारायणाद्रि:_*
*_वह अवस्था जहाँ कोई समान होने की अवस्था से भी आगे निकल जाता है और खुद ब्रह्मा बन जाता है।_*
*_यह नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह वह पहाड़ है जहाँ नारायण महर्षि ने तपस्या की थी।_*
*_सारांश;_*
*_तिरुमाला की सात पहाड़ियों पर चढ़ने का मतलब है…_*
*_कोई शारीरिक यात्रा नहीं,_*
_आत्मा की यात्रा,_**_गर्व से खुशी का रास्ता,_*
, के.वी.शर्मा विशाखापत्तनम A.P

Comments
Post a Comment