जन्मजात हार्ट प्रॉब्लम से डरने की कोई बात नहीं है - अगर समय पर पता चल जाए, तो बच्चे पूरी तरह से नॉर्मल ज़िंदगी जी सकते हैं – मेडिकवर हॉस्पिटल्स के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक*
उन्होंने कहा कि भारत में हर हज़ार बच्चों में से लगभग 8 से 12 बच्चे हार्ट प्रॉब्लम के साथ पैदा होते हैं। इसका मतलब है कि हर 100 लोगों में से लगभग एक को यह प्रॉब्लम होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उनमें से कुछ को जन्म के तुरंत बाद या पहले कुछ हफ़्तों में इलाज की ज़रूरत होती है। लेकिन उन्होंने कहा कि कई माता-पिता में सही अवेयरनेस की कमी के कारण इस प्रॉब्लम का पता देर से चल रहा है।
माता-पिता को किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए
डॉ. अशोक ने सलाह दी कि अगर बच्चों में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो उन्हें बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दूध पीते समय बहुत ज़्यादा थकान होना, सांस लेने में तेज़ी या मुश्किल होना, होंठों, उंगलियों या जीभ का नीला पड़ना, बार-बार सीने में इन्फेक्शन या निमोनिया होना, उम्र के हिसाब से वज़न न बढ़ना। डॉ. अशोक ने कहा, “आज की मेडिकल जानकारी से, दिल की बीमारियों का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाया जा सकता है। नए जन्मे बच्चों पर किए जाने वाले आसान टेस्ट से इस समस्या का पता लगाया जा सकता है। ज़्यादातर मामलों में, बिना किसी बड़ी सर्जरी के छोटी ट्यूब के ज़रिए कैथेटर ट्रीटमेंट से दिल की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि लगभग 500 बच्चे जिन्हें समय पर इलाज मिला, वे स्कूल जा रहे हैं, पढ़ाई कर रहे हैं और दूसरे बच्चों की तरह एक्टिव ज़िंदगी जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान की जाने वाली ‘फीटल हार्ट स्कैनिंग’ से बच्चे में दिल की समस्याओं का पहले पता लगाया जा सकता है। इससे जन्म के तुरंत बाद दिए जाने वाले इलाज की तैयारी में मदद मिल सकती है। डॉ. अशोक ने कहा, “अगर माता-पिता सावधान रहें तो बच्चों की ज़िंदगी सुरक्षित रहती है। छोटे से छोटे लक्षण को भी नज़रअंदाज़ न करें। अगर सही समय पर इलाज किया जाए, तो छोटा दिल भी बड़ी उम्मीदों के साथ भविष्य की ओर बढ़ सकता है।”
के.वी.शर्मा, संपादक,

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