आजकल, जब हम सोचते हैं कि सिर्फ़ हमारे अपने भाई-बहन ही खोए हुए हैं, तो हमें क्या फ़ायदा? आप एक ऐसी अनोखी पर्सनैलिटी हैं जो हमारे जर्नलिस्ट भाई-बहनों के साथ एक इंसान और एक ताकत की तरह खड़े रहते हैं जब वे मुश्किल में होते हैं… यही कहानी है… *गंतला श्रीनुबाबू*
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते
जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में
शिकन ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते
शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते
लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसी दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
उनका एक नेक दिमाग है जो जर्नलिस्ट शब्द पर रिस्पॉन्ड करता है, चाहे वे किसी भी यूनियन या क्लास के हों।
वे एक ऐसे सेवक हैं जिन्होंने खतरे में पड़े किसी भी व्यक्ति की मदद की है… चाहे वह जर्नलिस्ट हो या उनके परिवार के सदस्य, चाहे उन्हें फाइनेंशियल, मोरल या मेडिकल मदद की ज़रूरत हो।
उनकी स्पेशलिटी जर्नलिस्ट के बीच एकता को बढ़ावा देना और ज़रूरत पड़ने पर खुद आगे आकर मदद करना है।
बातों में नहीं, बल्कि कामों में दिखाई गई इंसानियत उनकी पर्सनैलिटी का सबूत है।
जर्नलिस्ट कम्युनिटी हमेशा ऐसे नेक सेवक, श्रीनुबाबू का एहसानमंद रहेगी। “सच्चा आदमी वो है जो मुश्किल समय में साथ दे” —
इस परिभाषा का सबूत है
*गंतला श्रीनुबाबू

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