*एक बार फाल्गुन महीने में आमलकी एकादशी आई। राजा अपनी सभी प्रजा के साथ नदी किनारे एक आंवले के पेड़ के पास गया। वहाँ उन्होंने बहुत सारे रीति-रिवाजों से विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा की और पूरी रात हरि का नाम लेते हुए जागरण किया।*
*🏹 शिकारी का उद्धार*
*उसी समय, वहाँ एक भूखा शिकारी आया। उसने बहुत सारे पाप किए थे और वह बहुत बेरहम था। शिकारी, जो खाने की तलाश में आया था, राजा और प्रजा की पूजा देखकर हैरान रह गया। भूखा होने के बावजूद, वह वहीं भजन और पुराणों का पाठ सुनता रहा। अनजाने में, उसने उस पूरी रात जागरण भी किया।*
*कुछ सालों बाद, शिकारी मर गया और अपने पुण्य के कारण, वह अगले जन्म में एक महान राजा (वसुरथ) के रूप में पैदा हुआ। एक दिन, वह जंगल में रास्ता भटक गया और बेहोश हो गया। फिर, जब कुछ दुश्मनों ने उसे मारने की कोशिश की, तो उसके शरीर से एक दिव्य शक्ति (देवता) निकली और सभी दुश्मनों को मार डाला।*
*जब वह उठा, तो वह सोच रहा था, "वह कौन सी शक्ति है जिसने मुझे बचाया?" तभी आकाशवाणी हुई, "हे राजा! यह 'आमलकी एकादशी' का व्रत है जो तुमने अनजाने में अपने पिछले जन्म में किया था, उसी के पुण्य ने आज तुम्हें बचाया है।" तब से राजा ने इस व्रत को और भी श्रद्धा से किया और आखिर में मोक्ष प्राप्त किया।*
(के.वी. शर्मा, एडिटर विशाखा संदेशम तेलुगु न्यूज़ पेपर्स और विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी न्यूज़ पेपर्स विशाखापत्तनम)

Comments
Post a Comment