जीवन: कभी अपने जीवन में कुछ नहीं कर पता है लेकिन इस संसार में लोगों जागरूकता पैदा करने के लिए कविताओं की रचना करते हैं! कभी-कभी-कभी आत्म विभोर हो जाता है! कभी-कभी रोता है और कभी-कभी हंसना भी है! कभी-कभी रातों भर सोता रहता है! कभी मनुष्य के जीवन को प्रेरणा देता है! कवि का सोच हर समय दुनिया को जागृत करना है!
कभी कविता लिखते समय चिंतित हो जाते हैं! क्योंकि उनके मन में तरह-तरह की भावनाएं जागृत होते रहते हैं उसे परवाह किए बिना कविता का रचना करते रहते हैं!
भारतवर्ष मैं बहुत से कई हुए जो छायावाद और रूढ़िवाद से जुड़े हुए हैं! जैसे गोस्वामी तुलसीदास जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला आदि!
आज भारतवर्ष में विशेष रूप से उत्तर भारत में युवा कवियों का बोलबाला है जो विशेष रूप से हास्य और व्यंग्य कविताएं लिखकर जनता को जागृत कर रहे हैं!
नेपाल के बहू क्षेत्रीय भाषा फाउंडेशन द्वारा देश-विदेश के कवियों को प्रोत्साहित करने हेतु निशुल्क अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिताओं का आयोजन कर उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर रहे हैं! जिन में नेपाल बहुत क्षेत्रीय भाषा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ आनंद गिरि मायालु और गुजरात के खाभोलज साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ शैलेश वनिया जी है जो हर महीने तीन या कर निशुल्क कविता प्रतियोगिताओं का आयोजन लोगों को निशुल्क प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हैं जो काफी गर्व की बात है!
के वी शर्मा,
संपादक,
विशाखापट्टनम दर्पण हिंदी पत्रिका,
विशाखा संदेशम तेलुगू मासिक पत्रिका,
विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश
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