बच्चे को बुखार और बार-बार दौरे पड़ने की वजह से हॉस्पिटल लाया गया था। दौरे लंबे समय तक जारी रहने और असर कम होने से हालत गंभीर हो गई। उसे तुरंत पीडियाट्रिक ICU (PICU) में भर्ती कराया गया और इमरजेंसी इलाज दिया गया। सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर उसे कुछ समय के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया। MRI स्कैन में दिमाग के खास हिस्सों में गंभीर सूजन और नुकसान का पता चला।
डॉ. साई सुनील किशोर ने डॉ. विजय कृष्णा और डॉ. मंजू वाणी के साथ मिलकर बच्चे को एंटीवायरल दवाएं, दौरा कंट्रोल करने वाली दवाएं, हाई-डोज़ स्टेरॉयड और IVIG दीं। इसके अलावा, दिमाग में सूजन कम करने के लिए टोसिलिज़ुमैब नाम की एक खास बायोलॉजिकल दवा का इस्तेमाल किया गया।
बच्चा, जिस पर इलाज का अच्छा असर हुआ, धीरे-धीरे ठीक हो गया और आवाज़ों पर रिस्पॉन्ड करने और आवाज़ें पहचानने लगा। बाद में वेंटिलेटर को सक्सेसफुली हटा दिया गया और अभी उसकी सेहत ठीक है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
डॉक्टरों ने कहा कि इस मुश्किल हालात का सक्सेसफुल नतीजा समय पर पहचान, लेटेस्ट इलाज और मेडिकल टीम की लगातार मॉनिटरिंग की वजह से मुमकिन हुआ।

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