अंतर्वेदी में दिखा यह सीन हमारे समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी है। जो जानवर ज़िंदा रहते हुए खाने की तलाश में था, आखिर में हमारे फेंके गए प्लास्टिक कचरे का शिकार हो गया। भूख से तड़पते हुए प्लास्टिक की थैलियों को खाना समझकर निगलने वाले इस जानवर की जान चली गई।
भले ही शरीर सड़ गया हो और सिर्फ़ कंकाल बचा हो, लेकिन प्लास्टिक का बचा रहना चिंता की बात है।
हमारे लापरवाही से फेंके गए प्लास्टिक की वजह से हर दिन हज़ारों जानवर ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं। कोई भी जीवित प्राणी, जैसे भैंस, कुत्ते और पक्षी, इसका शिकार हो सकते हैं। यह समस्या और भी बदतर होती जा रही है, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
हालांकि प्लास्टिक हमें सुविधा देता है, लेकिन साथ ही यह प्रकृति के लिए एक अभिशाप बन गया है। जिन प्लास्टिक थैलियों और बोतलों को हम एक बार इस्तेमाल करके फेंक देते हैं, उन्हें प्रकृति में गलने में सैकड़ों साल लग जाते हैं।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रकृति को बचाने का मतलब है खुद को बचाना....
K.V.SHARMA EDITOR

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