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Showing posts from May, 2026

श्री वाई. बालाजी किरण, जो 2013 बैच के भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) अधिकारी हैं, ने दक्षिण तट रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है।

विशाखापत्तनम : विशाखापत्तनम दर्पण :इस ज़िम्मेदारी के अलावा, श्री बालाजी किरण नवंबर 2025 से दक्षिण तट रेलवे में उप महाप्रबंधक-सह-महाप्रबंधक के सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। भारतीय रेलवे में यातायात और वाणिज्यिक कार्यों का व्यापक अनुभव रखने वाले श्री बालाजी किरण ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें गुंटकल मंडल के वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, तथा सिकंदराबाद और हैदराबाद मंडलों के वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक के पद शामिल हैं। श्री बालाजी किरण ने श्रीकालहस्ती स्थित श्रीकालहस्तीश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SKIT) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से MBA तथा राजनीति विज्ञान और औद्योगिक संबंधों में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा के मूल निवासी श्री बालाजी किरण, सामाजिक सेवा और युवा विकास के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं। वे नायडुपेटा में कार्यरत NGO "आसया" (Asaya) के संस्थापक हैं और उन्होंने सामुदायिक कल्याण से जुड़ी विभिन्न पहलों में...

खुशी

 हंसी से मिलने वाली खुशी, दिल का मीठा गाना। छोटी-छोटी उम्मीदें फूलों की माला की तरह होती हैं, चांदनी की तरह जो दिल को छू जाती है। ज़िंदगी मुश्किलों से पार पाने, गुस्सा छोड़ने, हर पल का मज़ा लेने, और खुशी से जीने के बारे में है! पूरी मुस्कान के पीछे, सच्ची खुशी छिपी होती है। भले ही वह कुछ देर के लिए हो, वह एहसास बहुत बढ़िया होता है!                                                     के वी. शर्मा                               विशाखापत्तनम                              आंध्र प्रदेश

इंसान में इंसानियत

 इंसान में इंसानियत के बारे में अब्दुल कलाम की सुनाई आखिरी कहानी एक पिता और बेटा एक मंदिर में गए, और जब बेटे ने दरवाज़े पर खंभों पर शेर के चेहरे खुदे हुए देखे तो वह डर गया। वह डर के मारे चिल्लाया, "पिताजी, शेर दौड़कर हमें मार डालेगा।" फिर पिता ने अपने बेटे को पास लिया और कहा, "डरो मत बाबू, ये तो बस मूर्तियां हैं, ये हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी।" लड़के ने पूछा, "भगवान उसी रूप में हमारा भला कैसे कर सकते हैं?" ये बातें सुनकर पिता ने यह बात अपनी डायरी में लिख ली। उस दिन से लेकर आज तक, मेरे पास उनके सवाल का कोई जवाब नहीं है। लेकिन तब से, मैंने मूर्तियों में नहीं बल्कि इंसानों में भगवान को ढूंढना शुरू कर दिया..... भगवान तो नहीं मिले, लेकिन इंसानियत मिल गई, .......!! के.वी.शर्मा एडिटर विशाखा संदेशम और विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी न्यूज़ पेपर विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश