दिल्ली /विशाखापत्तनम: विशाखापत्तनम दर्पण: देश की पहली बुलेट ट्रेन का इंतजार कर रहे करोड़ों भारतीयों के लिए एक बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। रेल मंत्रालय ने इस हाई-स्पीड ट्रेन की पहली आधिकारिक झलक प्रदर्शित की है, जिसने देशवासियों के बीच उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। मंत्रालय परिसर के गेट नंबर-4 पर इस आधुनिक ट्रेन की एक बेहद शानदार तस्वीर लगाई गई है। इस फोटो में अत्याधुनिक तकनीक से लैस हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन का चमचमाता हुआ फ्यूचरिस्टिक डिजाइन साफ नजर आ रहा है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर यह फोटो तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए और स्वर्णिम युग की शुरुआत मान रहे हैं।
रफ्तार के साथ बदलेगी देश की तस्वीर
भारत सरकार पिछले काफी समय से देश का पहला हाई-स्पीड रेल नेटवर्क तैयार करने के इस महा-मिशन पर जुटी हुई है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को इस दिशा में सबसे बड़ी और पहली शुरुआत माना जा रहा है। पूरी तरह से जापानी तकनीक पर आधारित इस प्रोजेक्ट के जरिए यात्रियों को रफ्तार के साथ-साथ बेहद सुरक्षित और वर्ल्ड क्लास सफर का अनुभव मिलेगा। इस बुलेट ट्रेन परियोजना को केवल यातायात के साधन के रूप में नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक तरक्की और आधुनिक बुनियादी ढांचे के एक बड़े ग्लोबल प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। इसके शुरू होने से दो बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा का समय बेहद कम हो जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के असीमित नए अवसर पैदा होंगे।
समंदर के नीचे खुदाई के लिए उतरी देश की सबसे विशाल मशीन
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर काम बेहद युद्धस्तर पर चल रहा है। इसी सिलसिले में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने एक और ऐतिहासिक कामयाबी का एलान किया है। मुंबई के पूर्वी उपनगर विक्रोली में सुरंग निर्माण के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) का भारी-भरकम कटरहेड जमीन के नीचे सफलतापूर्वक उतार दिया गया है। करीब 13.6 मीटर व्यास और 350 टन वजनी इस कटरहेड को नीचे उतारना इस कॉरिडोर परियोजना के लिए मुख्य शील्ड की असेंबली का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
भारत में पहली बार बनेगी ऐसी समुद्री रेल सुरंग
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत 21 किलोमीटर लंबी एक जटिल सुरंग का निर्माण किया जाना है। इसके 16 किलोमीटर के हिस्से को खोदने के लिए दो विशालकाय टीबीएम मशीनों को आपस में जोड़ा जा रहा है, जिनमें से प्रत्येक मशीन का वजन 3,000 टन से भी ज्यादा है। इस पूरे रूट की सबसे बड़ी खासियत ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग है, जो भारत के इतिहास की पहली अंडरसी रेल टनल (समुद्री रेल सुरंग) होगी। देश में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक की सबसे बड़ी और महाकाय मशीन तैनात की गई है। इसके कटरहेड को इस तरह विशेष रूप से डिजाइन किया गया है कि यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की आने और जाने वाली (Up व Down) दोनों लाइनों को एक साथ समाहित करने के लिए पर्याप्त बड़ी सुरंग की खुदाई अकेले कर सके।
के.वी.शर्मा,
संपादक,

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