विशाखापत्तनम : विशाखापत्तनम दर्पण : 27मई , मॉडर्न मेडिसिन अब गंभीर अस्थमा से परेशान हज़ारों मरीज़ों के लिए नई उम्मीद दे रही है। “बायोलॉजिक्स” नाम का एक खास इलाज आजकल उन मरीज़ों के लिए एक असरदार सॉल्यूशन बन रहा है, जिन्हें रेगुलर इनहेलर और दवाएँ लेने के बावजूद अक्सर साँस लेने में दिक्कत, रात में खांसी और इमरजेंसी हॉस्पिटल ट्रीटमेंट का सामना करना पड़ता है।
बायोलॉजिक्स मॉडर्न इंजेक्टेबल दवाएँ हैं जो शरीर में खास इन्फ्लेमेटरी पाथवे को टारगेट करती हैं जो अस्थमा को बढ़ाते हैं। वे मरीज़ों में एयरवे की सूजन को कम करने में मदद करते हैं और अस्थमा अटैक की संख्या को काफी कम करते हैं। यह इलाज ज़िंदगी की क्वालिटी को बेहतर बना रहा है, खासकर उन मरीज़ों के लिए जिन्हें अक्सर स्टेरॉयड की ज़रूरत होती है।
कई एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही मरीज़ों की पहचान करके और उन्हें बायोलॉजिक्स देने से न सिर्फ हॉस्पिटल में भर्ती होने वालों की संख्या कम हो सकती है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी भी ज़्यादा आरामदायक हो सकती है। यह इलाज अभी भारत में कई खास रेस्पिरेटरी सेंटर्स पर उपलब्ध है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि अस्थमा के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि अगर लगातार खांसी, साँस लेने में तकलीफ और सीने में जकड़न जैसी समस्याएँ हों तो तुरंत रेस्पिरेटरी स्पेशलिस्ट से सलाह लें। गंभीर अस्थमा के बारे में जागरूकता बढ़ाकर, कई मरीज़ हेल्दी ज़िंदगी जी सकते हैं।
मेडिकवर हॉस्पिटल के चीफ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ए प्रेम कुमार ने बताया।
और पल्मोनोलॉजी डॉक्टर सत्य पद्मजा मंथा, डॉ. मोनिशा सिल्ला, डॉ. सुधीर ताले और यूनिट हेड डॉ. अरुण कुमार की एक टीम ने हिस्सा लिया।
के.वी.शर्मा, संपादक,

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