विशाखापत्तनम :विशाखापत्तनम दर्पण : वर्ल्ड इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (IBD) डे के मौके पर, मेडिकवर हॉस्पिटल्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एक्सपर्ट्स ने कहा कि IBD का जल्दी पता लगाना, लोगों में जागरूकता लाना और समय पर इलाज सबसे ज़रूरी है। इस साल की थीम "IBD की कोई सीमा नहीं है – IBD केयर तक पहुँच" दुनिया को याद दिलाती है कि हर मरीज़ को अच्छी हेल्थकेयर मिलनी चाहिए।
मेडिकवर हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. अनिरुद्ध कोव्वाली ने कहा कि अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिज़ीज़ जैसे IBD के मामले आजकल युवाओं में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खान-पान की बदलती आदतें, स्ट्रेस, फिजिकल एक्टिविटी में कमी और ज़्यादा एंटीबायोटिक इस्तेमाल जैसे कारणों से ये बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
पुराने डायरिया, पेट दर्द, मल में खून, वज़न कम होना और थकान जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ किए बिना तुरंत गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से सलाह लेने की सलाह दी जाती है। देर से पता चलने पर आंतों की समस्याएँ, कुपोषण और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी मौजूद बायोलॉजिक थेरेपी, मॉडर्न इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से IBD को असरदार तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया है कि सेहत बनाए रखने के लिए बैलेंस्ड डाइट, स्ट्रेस मैनेजमेंट, हाइजीन और रेगुलर मेडिकल चेकअप ज़रूरी हैं।
के.वी.शर्मा,
संपादक,

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