Skip to main content

11 जनवरी 1966 की वो रात, जब ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत हुई, तो पूरा देश रो पड़ा था।


 जनवरी 1966 की वो रात, जब ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत हुई, तो पूरा देश रो पड़ा था।

लेकिन हैरानी तो तब हुई जब उनकी मौत के बाद उनकी संपत्ति का हिसाब हुआ। लोग सोच रहे थे कि जो इंसान देश का 'प्रधान' था, जिसके एक दस्तखत से करोड़ों-अरबों के फैसले होते थे, उसने अपने परिवार के लिए क्या छोड़ा होगा?

जब जाँच हुई, तो जो सच सामने आया उसने सबकी आँखों में आँसू ला दिए

दिल्ली की बड़ी कोठियों में रहने वाले इस शख्स के नाम अपनी एक इंच जमीन तक नहीं थी।

उनकी अलमारी में बस कुछ खादी के कुर्ते मिले। आपको जानकर हैरानी होगी कि उनमें से कई कुर्ते फटे हुए थे, जिन्हें उनकी पत्नी ललिता जी ने खुद रफू (Stitch) किया था।

उनके खाते में इतने पैसे भी नहीं थे कि एक पुरानी कार की किश्त (EMI) चुकाई जा सके। 

सबसे भावुक कर देने वाली बात तो ये थी कि शास्त्री जी ने अपने बच्चों के कहने पर एक 'फिएट कार' लोन लेकर खरीदी थी। उनकी मौत के बाद उस कार का 5,000 रुपये का कर्ज बाकी था। जिसे बाद में उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के एक-एक पैसे जोड़कर चुकाया। 💔

जिस इंसान के एक कहने पर पूरा देश "एक वक्त का उपवास" रखने लगा था, उस इंसान ने अपने बच्चों के लिए विरासत में एक चवन्नी तक नहीं छोड़ी। 

आज हम थोड़ा सा पैसा या रुतबा पाकर घमंड में चूर हो जाते हैं। लेकिन शास्त्री जी ने सिखाया कि "इंसान पद से नहीं, अपने चरित्र से बड़ा होता है।"

वो चाहते तो अरबों की संपत्ति बना सकते थे, लेकिन उन्होंने 'ईमानदारी' को चुना। आज के दिखावे वाले दौर में क्या हमें ऐसे नेताओं की याद नहीं आती?

अगर शास्त्री जी की ये सादगी आपके दिल को छू गई हो, तो इस पोस्ट को इतना शेयर करो कि आज के समाज को असली 'हीरो' की पहचान हो सके।

क्या आपको लगता है कि आज के दौर में ऐसा नेता मिलना मुमकिन है? 

 यह आइटम एडिटर के वी शर्मा ने इकट्ठा किया था।

Comments