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Showing posts from June, 2026

समाज सेवक डॉ कमल बैद जी को प्राप्त हुए सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हुए सूची इस प्रकार है

.                        के· वी· शर्मा संपादक विशाखापट्टनम :समाज सेवक डॉ कमल बैद जी को प्राप्त हुए सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हुए सूची इस प्रकार है                       नाम : कमल बैद                        पता: निदेशक ACNINFOTECH (इंडिया) प्रा.  लिमिटेड 3ए बालाजी मंगलगिरि चैंबर्स, सिरिपुरम, विशाखापत्तनम. ईमेल: kb@acninfotech.com मोबाइल : 9393969518 व्हाट्सएप: 8826074183 कार्यालय: 0891-2541522 जन्म तिथि : 21 जनवरी, 1946 तिथि शादी का : 2 दूसरी जुलाई, 1965 पत्नी : लीला बैद संस : अमन बैद चमनबैद नमन बैद पोर्टफोलियो, जिम्मेदारियाँ और सदस्य जहाज:   सचिव: रोटरी क्लब, राजम 1991-92 अध्यक्ष: महावीर इंटरनेशनल, विशाखापत्तनम 2001-06 अध्यक्ष: रोटरी क्लब, विशाखा पोर्ट सिटी, 2003-04 अध्यक्ष: जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, वीएसकेपी 2003-05 उपाध्यक्ष: साईसिरिशा फाउंडेशन। ...

पितृ दिवस पर कविता!

 पिताविश्वास है , पिता हिम्मत है , पिता कल्पना वह पेड़ है,  जो मुश्किलों को पिघल देता है,  उनका मन मक्खन जैसा है,  उनका स्पर्श सर्दियों की बर्फ जैसा है  पिता हमारे लिए आईना है,  पिता वह भगवान के रूप है,  जो बिना पंखों के आसमान दिखाई है , पिता मेरे साथी है,  जो हमारे कदमों में चलता है,  पिता हमारे अध्यापक हैं,  जो हमें जीना सिखाया है,  अगर मां मुझे सुलाती है,  तो पिता मुझे जागते हैं,  मेरे पिता मेरे लिए सपने देखते हैं,  मेरे पिता मेरे लिए भविष्य की चिंता करते हैं,  भले ही वह कर्ज ले ले,  मेरे पिता मेरे लिए जीवन का गाइड है,  जो नैतिकता का एक सबूत है,                                  के ·वी· शर्मा,                                लेखक एवं संपादक

योग - ज़िंदगी का योग

आइए हम हर सुबह जल्दी उठें,                            योग करना शुरू करें,                             और ठीक से सांस लें,                           और एक हेल्दी ज़िंदगी जिएं!                      आइए हम बीमारियों को खुद को छूने न दें,                     और हमें पता न चले कि स्ट्रेस क्या होता है,                     और आइए हम अपने मन को शांत रखें,                     और आइए हम योग से खुशी पाएं!                      योग कोई एक्सरसाइज़ नहीं है,                      यह ज़िंदगी ज...

बदलती हुई सोच और बदलती भावनाएं

                           के· वी· शर्मा लेखक एवं संपादक अगर सोच बदलती है, तो वैल्यू बदल जाती हैं अगर सोच बदलती है, तो वैल्यू घट जाती हैं अगर क्वालिटी बदलती है, तो व्यवहार बदल जाता है व्यवहार से वैल्यू बढ़ती और घटती हैं अगर कोई अच्छा इंसान चोरी करता है, तो क्वालिटी से वैल्यू बदल जाती है, और अगर कोई चोर अपनी क्वालिटी बदलकर अच्छा व्यवहार करता है, तो वैल्यू बदल जाती है जब घर में बना पायसम भगवान को चढ़ाया जाता है, तो पायसम में कोई बदलाव नहीं होता। उसमें वही दूध, गुड़ और चावल होते हैं। लेकिन हमारी नज़र में, वह आम खाना नहीं रह जाता; वह प्रसाद होता है। क्योंकि वह भक्ति, आभार और समर्पण की भावनाओं से जुड़ा होता है। इसी तरह, जब हम अपने पास मौजूद पैसे दान करते हैं, तो पैसे का रूप नहीं बदलता। नोट वही रहता है, कीमत वही रहती है। लेकिन जब वह किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचता है, तो उस पैसे में दया, मदद और परोपकार के भाव जुड़ जाते हैं। इसीलिए दान को पुण्य माना जाता है। चीज़ नहीं, बल्कि इरादा मायने रखता है। अगर कोई फूल पेड़ प...

मेरी बचपन की यादें मेरा आशीर्वाद

 बचपन हमारे लिए एक आशीर्वाद है जब हम बड़े हुए, तो हमें पैसे की कीमत पता चली हमें लोगों की कीमत और भी ज़्यादा पता चली वो दिन जब हम 10 पैसे में सौदा करते थे 5 पैसे की आइसक्रीम खाकर स्वर्ग देखने की खुशी वो रातें जब हम पुरानी किताबें खरीदते और पढ़ते थे वो शामें जब हम रेडियो पर गाने सुनते-सुनते सो जाते थे ये सब सिर्फ़ यादें नहीं हैं एक खूबसूरत दौर उस समय, हर घर में चूल्हा होता था लोग उस चूल्हे पर रहते थे अब बड़े-बड़े घर हैं लेकिन उस चूल्हे जैसा कनेक्शन नहीं दिखता पड़ोसी रिश्तेदार जैसे थे उनके घर में जो भी बनता था, हमारे घर आता था हमारे घर में जो भी बनता था, उनके घर जाता था भले ही दीवारें अलग थीं हमारे मन एक थे हम राशन की लाइन में खड़े होते थे लेकिन हमने सब्र करना सीखा हम बिना जूतों के स्कूल जाते थे लेकिन हम ज़िंदगी में ऊँचे उठे भले ही लग्ज़री नहीं थीं, वैल्यूज़ थीं भले ही सुविधाएँ नहीं थीं, खुशी थी गोले टोक्कुडू बिल्ला उन खेलों में सिर्फ़ जीत और हार नहीं होती थी दोस्ती थी सहयोग था ज़िंदगी थी हम वो थे जो गंगिरेद्दू का इंतज़ार करते थे वो जो तोते की भविष्यवाणी ...

पैसा किसी इंसान के लिए काफ़ी क्यों नहीं है...?*

गरीबों के लिए भी, यह काफ़ी नहीं है।अमीरों के लिए भी, यह काफ़ी नहीं है।इंसान की इनकम से ज़्यादा,..इंसान की उम्मीदें ऊँची होती हैं।आजकल, काम करने वालों को मज़दूरी काफ़ी नहीं मिलती।जो काम करते हैं, उनकी सैलरी काफ़ी नहीं होती।बिज़नेस करने वालों को मुनाफ़ा काफ़ी नहीं होता।खेती करने वाले किसान को फ़सल काफ़ी नहीं होती। गरीब कहते हैं, "पैसा काफ़ी नहीं है।" मिडिल क्लास कहता है, "मुझे और चाहिए।" अमीर भी कहते हैं, "यह काफ़ी नहीं है।" तो, क्या प्रॉब्लम पैसे की है? या इंसान की सोच की है? इंसान की ज़िंदगी हमेशा आज में नहीं होती। उसका दिमाग़ हमेशा दो कदम आगे रहता है। शरीर आज में है। दिमाग़ कल में है। इसीलिए इनकम काफ़ी नहीं है। सौ रुपये वाला इंसान दो सौ ज़रूरतें मान रहा है। हज़ार रुपये वाला इंसान दो हज़ार के खर्चे शुरू कर रहा है। एक लाख रुपये कमाने वाला इंसान दो लाख का काम शुरू कर रहा है। दस लाख कमाने वाला इंसान बीस लाख के सपने देख रहा है। एक करोड़ रुपये कमाने वाला इंसान दो करोड़ के बिज़नेस के बारे में सोच रहा है। सौ करोड़ वाले इंसान भी दो सौ करोड़ और कमाने के बा...

नगर के जाने माने समाज सेवक दानदाता एवं गरीबों के मसीह कहलन वाले डॉ कमल बैद जी आत्मनिर्भर भारत गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित हुई!

विशाखापट्टनम: विशाखापट्टनम दर्पण न्यूज़: 13 जून नगर के जाने-माने समाजसेवक दानदाता और गरीबों के मसीह कहलन वाले डॉक्टर कमल बैद जी एक कार्यक्रम के दौरान आत्मनिर्भर भारत गौरव सम्मान 2026 के तहत सम्मानित हुए! कुछ  कार्यक्रम में करीबन 600 से भी अधिक लोगों ने भाग लेकर डॉ कमल जी जय जयकार के नारे के नारे लगाए गए! ज्ञात रहे की इस तरह का सम्मान केवल उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है जो सच्चा समाज सेवा किया करते हैं! मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कमल जी को और अधिक से अधिक सम्मान मिले!                         के.वी.शर्मा, संपादक,

नगर से जाने वाली समाज सेवक डॉ कमल बैद जी कोई द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ सम्मानित हुई!

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धरती माता के प्रति

        धरती माता के प्रति        करुणा का प्रत्येक कार्य         शाश्वत परिवर्तन लाता है,         जिसका मूल्य आप माप नहीं सकते।        इसलिए अपना कूड़ा उठा लो            मेरे लिए मत छोड़ो।          मैं भी अपना काम करूंगा ,             जैसे पेड़ लगाना।                हमें करना ही होगा।               क्योंकि, आप जानते हैं           हममें से प्रत्येक यहीं रहता है।           और हम अपने बाद आने वाली                पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ेंगे?           क्या वे हमारे ग्रह को संजोकर रखेंगे               या उसके लिए शोक मनाएंगे?               ...