इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों ने देश भर में विश्वविद्यालय से वैश्विक स्तर तक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दी हैं। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले जी.एम.सी. बालयोगी, वर्तमान राज्यपाल डॉ. कम्भमपति हरिबाबू, और राज्यसभा सदस्य फोफेसर यार्लगाड्डा लक्ष्मी प्रसाद जैसे नेता इस संस्थान के लिए गर्व का विषय हैं।
इसके अलावा, कई वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों, डॉक्टरों और इंजीनियरों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश की सर्वोच्च नागरिक सेवाओं (IAS/IPS) में यहाँ के सैकड़ों छात्र चयनित होकर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।
प्रमुख विभूतियाँ और उनका योगदान
प्रोफेसर यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद:
एक प्रतिष्ठित लेखक, शिक्षाविद् और राजनीतिज्ञ हैं, जिन्हें साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया गया । उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।वे हिंदी व तेलुगु भाषाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के अध्यक्ष के रूप में राजभाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
डॉ. बी.आर. राव: आंध्र विश्वविद्यालय के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।
डॉ. एस. राधाकृष्णन और डॉ. सी.आर. रेड्डी: भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. सी.आर. रेड्डी ने आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और विश्वविद्यालय के प्रशासन को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनकी प्रतिभा को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें UGC का अध्यक्ष नियुक्त किया।
डॉ. कोट्टा सच्चिदानंद मूर्ति: एक प्रसिद्ध भारतीय दार्शनिक थे। उन्होंने दर्शनशास्त्र में गहन शोध कर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वे भी UGC के उपाध्यक्ष रहे और उनके लेखन ने भारतीय दर्शन को एक नई दिशा दी।
प्रोफेसर जे.वी. चेलम: अर्थशास्त्र के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने देश की आर्थिक नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक निरंतर मशाल
विश्वविद्यालय के लगभग 50 से अधिक प्रोफेसरों ने अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के रूप में कार्य किया है। लेख में यह भी उल्लेख है कि शिक्षा एक निरंतर चलने वाला प्रवाह है और आंध्र विश्वविद्यालय इस प्रवाह का एक मुख्य केंद्र है।
यह विश्वविद्यालय एक "ज्ञान के दीप" की तरह है, जो आने वाली पीढ़ियों को रोशन करता रहेगा। अंत में, लेख में विश्वविद्यालय की भविष्य की सफलता की कामना करते हुए इसे नमन किया गया है।
शिक्षा एक निरंतर चलने वाला प्रवाह है और आंध्र विश्वविद्यालय इस प्रवाह का एक मुख्य केंद्र है ।
यह विश्वविद्यालय एक ज्ञान की दीप की तरह है, जो आने वाली रोशन करता रहेगा।
K .V.SHARMA EDITOR



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