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हिंदी साहित्य भारती के तत्वावधान में “कथांजलि” पुस्तक का भव्य लोकार्पण

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 विशाखापत्तनम:विशाखापत्तनम दर्पण समाचार: साहित्य भारती के तत्वावधान में डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी द्वारा रचित “कथांजलि” पुस्तक का लोकार्पण समारोह शनिवार सायं 6 बजे विशाखापट्टनम के नागरिक पुस्तकालय में भव्य रूप से आयोजित किया गया।



इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद्, नागार्जुन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा गांधी सेंटर के अध्यक्ष आचार्य वी. बालमोहनदास ने की। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. के. राजशेखर ने अतिथियों का मंच पर स्वागत करते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।


इसके पश्चात डॉ. एस.एस. कृष्णबाबू ने हिंदी साहित्य भारती के उद्देश्यों एवं कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ला द्वारा स्थापित यह संस्था “वसुधैव कुटुम्बकम्” की महान भावना के साथ मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए सतत कार्य कर रही है।



हिंदी साहित्य भारती आंध्र प्रदेश शाखा की अध्यक्ष एवं सेंट जोसेफ कॉलेज की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी द्वारा रचित “कथांजलि” पुस्तक का लोकार्पण अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया।



प्रख्यात साहित्यकार डॉ. डी.वी. सूर्याराव ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि “कथांजलि” की कहानियाँ समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रतिबिंबित करती हैं तथा पाठकों को चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने लेखिका की कथन शैली, सामाजिक संवेदनशीलता तथा साहित्यिक मूल्यों का विश्लेषण किया।


पुस्तक की प्रथम प्रति श्री प्रभाकर ने ग्रहण कर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. कनकमहालक्ष्मी, श्री मल्लाप्रगड रामाराव तथा श्रीमती दामराजु विशालाक्षी सहित अनेक वक्ताओं ने लेखिका को बधाई दी।


डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी ने अपने संबोधन में कहा कि संस्था भारतीय भाषाओं के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा हिंदी साहित्य भारती को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भाषाओं के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह प्रसन्नता व्यक्त की कि हिंदी साहित्य भारती में 100 से अधिक स्थायी सदस्य जुड़े हैं तथा सदस्यों के सहयोग से संस्था की गतिविधियों का और अधिक विस्तार किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा, “यह संस्था हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति तथा सनातन मूल्यों के प्रचार-प्रसार का उत्कृष्ट कार्य कर रही है।”



अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य वी. बालमोहनदास ने भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं मानवीय मूल्यों के आधार पर युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा युवाओं में साहित्यिक अभिरुचि विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।


कार्यक्रम के अंतर्गत हिंदी साहित्य भारती के नवसदस्यों का परिचय कराया गया तथा उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर डॉ. रमणमूर्ति, डॉ. अनीता, डॉ. हाइमा, राधारानी, डॉ. मुरलीकृष्ण तथा आदिलक्ष्मी आदि ने हिंदी साहित्य भारती अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा संचालित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना की।

अंत में डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी ने अपनी पुस्तक को प्रोत्साहन देने वाले हिंदी साहित्य भारती के पदाधिकारियों एवं समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने हिंदी साहित्य भारती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित कर भारतीय भाषाओं, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए विश्वव्यापी मंच के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, भाषा-प्रेमियों, हिंदी साहित्य भारती के सदस्यों तथा अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

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