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विश्व पर्यावरण दिवस पर हिन्दी साहित्य भारती इंटरनेशनल, आंध्र प्रदेश द्वारा संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित


विशाखापट्टनम, 5 जून 2026।हिन्दी साहित्य भारती इंटरनेशनल, आंध्र प्रदेश के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं प्रार्थना के साथ हुआ।

हिन्दी साहित्य भारती इंटरनेशनल, आंध्र प्रदेश की राज्य अध्यक्षा प्रो. डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी ने अतिथियों, साहित्यकारों एवं सहभागियों का स्वागत करते हुए पर्यावरण संरक्षण तथा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. टी. हैमावती ने किया।


मुख्य वक्ता सुश्री बी. वारिजा (हिन्दी आचार्या, पाडेरु) ने हिन्दी पत्रकारिता के प्रथम संपादक पंडित युगल किशोर शुक्ल तथा उनकी ऐतिहासिक पत्रिका ‘उदंत मार्तंड’ के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता की सुदृढ़ परंपरा की नींव पंडित युगल किशोर शुक्ल ने रखी थी। उनका परिचय डॉ. बी. मधुमति ने प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि सुश्री दामराजु विशालाक्षी ने व्यक्तित्व विकास विषय पर अत्यंत प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, अनुशासन तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को सफलता का आधार बताते हुए उपस्थित जनों को जीवन में निरंतर आत्म-विकास के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।

कवि सम्मेलन में डॉ. बी. मधुमति, डॉ. शांति, डॉ. हैमा, श्री वासुदेव राव, सुश्री श्यामला, डॉ. रमणमूर्ति, श्रीमती राधारानी तथा सुश्री स्वराज्य लक्ष्मी ने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति प्रेम, जल-संरक्षण तथा हरित जीवनशैली पर आधारित अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया।


अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एस. कृबाबु ने हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा, साहित्य की सामाजिक भूमिका तथा पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी ने हिन्दी साहित्य भारती इंटरनेशनल के उद्देश्यों, गतिविधियों तथा देश-विदेश में संचालित साहित्यिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि अब तक 73 साहित्यप्रेमियों ने हिन्दी साहित्य भारती की आजीवन सदस्यता ग्रहण की है। साथ ही आने वाले समय में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कवि सम्मेलनों तथा साहित्यिक कार्यक्रमों के आयोजन की जानकारी भी दी।

उन्होंने हिन्दी साहित्य भारती इंटरनेशनल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र शुक्ल के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं संस्था के विकास में उनके अमूल्य योगदान के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।

अंत में प्रो. डॉ. पी.के. जयलक्ष्मी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, कवियों एवं सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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