सुबह की पहली ɟकरण जगाए,
ठंडी हवा मन को ह;ार्षाए,
चलो उठो अब आलस छोड़ो,
तन और मन को योग से जोड़ो।
ताड़ासन से कद को बढ़ाएं,
ɟत्रिकोणासन से लचीलापन लाएं,
वीरभद्रासन सा साहस जागे,
तन की सारी सुस्ती भागे।
रीढ़ बने मजबूत हमारी,
दूर रहे हर एक बीमारी,
भुजंगासन और धनुरासन,
चुस्त-दुरुस्त कर देते आसन।
सांसों की गɟत पर ध्यान लगाएं,
प्राणायाम से मन शांत बनाएं,
भीतर जो गहरी सांस समाए,
अंग-अंग में ऊजार्षा भर जाए।
शवासन में ɟफिर खो जाना,
थकान ɠमटाकर शांɟत पाना,
योग नहीं बस एक कसरत है,
यह तो जीने की सुंदर आदत है।
करो योग और रहो ɟनरोग,
यह है जीवन का सच्चा भोग।
रोज सुबह जो योग अपनाए,
दीार्षायु और सुख वो पाए।
पटेल कै लाशबेन
आणंद, गुजरात

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