अद्वैत ज्योति शंकराचार्य ज्ञान का प्रकाश दुनिया पर फैला, सनातन धर्म की रक्षा के उद्देश्य से! केरल के तट पर कलाडी गाँव में, स्वयं शिव शंकर के रूप में अव जिस त्याग ने बचपन में ही त्याग का मार्ग अपनाया, जिस दिव्य महिमा ने भारत की महिलाओं को जगाया! उन्होंने भ्रम की दुनिया को झूठा बताया, और दुनिया को दिखाया कि आत्मा ही सत्य है! अद्वैत सिद्धांत के अमृत से, और भक्ति और मुक्ति के मार्गों की खुशबू से! उन्होंने चार वेदों की स्थापना की और धर्म के रथ को चारों दिशाओं में चलाया! उन्होंने भक्ति को भज गोविंदम कहकर सिखाया, और ज्ञान को ज्ञान के रत्न की तरह बिखेरा! बत्तीस साल की छोटी सी उम्र में, वे हमेशा के लिए विश्व गुरु बन गए! आदि शंकराचार्य के चरणों में, भक्ति में करोड़ों कोटि प्रणाम यह कविता के ·वी· शर्मा संपादक विशाखा संदेशम एवं विशाखापट्टनम दर्पण समाचार पत्रिका विशाखापट्टनम द्वारा संपादित किया गया है