धरती माता के प्रति
करुणा का प्रत्येक कार्य
शाश्वत परिवर्तन लाता है,
जिसका मूल्य आप माप नहीं सकते।
इसलिए अपना कूड़ा उठा लो
मेरे लिए मत छोड़ो।
मैं भी अपना काम करूंगा
, जैसे पेड़ लगाना।
हमें करना ही होगा।
क्योंकि, आप जानते हैं
हममें से प्रत्येक यहीं रहता है।
और हम अपने बाद आने वाली
पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ेंगे?
क्या वे हमारे ग्रह को संजोकर रखेंगे
या उसके लिए शोक मनाएंगे?
यह हम पर निर्भर करता है।
लेखक और संपादन: के. वी. शर्मा

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