विशाखापत्तनम मेडिकवर ने स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सुइट लॉन्च किया......पांच साल में 10,000 से ज़्यादा ब्रोंकोस्कोपी.. रिसर्च और ट्रेनिंग में सबसे आगे
27 जुलाई, विशाखापत्तनम.पल्मोनोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि विशाखापत्तनम के MVP कॉलोनी में मेडिकवर हॉस्पिटल्स में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाओं के साथ बनाए गए "स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सुइट" के ज़रिए फेफड़ों की बीमारियों के डायग्नोसिस और इलाज में एक नया चैप्टर शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के ज़रिए आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्यों से आने वाले मरीज़ों को वर्ल्ड-क्लास मेडिकल सर्विस दी जा रही हैं। सोमवार सुबह मेडिकवर हॉस्पिटल्स में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पिछले पांच सालों से, डॉ. सुधीर, डॉ. मोनिशा और डॉ. सत्यपद्मजा एक ही टीम के तौर पर काम कर रहे हैं और 24 घंटे पूरी पल्मोनोलॉजी सर्विस दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरीज़ों को ज़्यादा सटीक और असरदार इलाज मिल रहा है क्योंकि एक्सपर्ट्स की एक टीम हर मुश्किल केस को एक साथ एनालाइज़ करती है और इलाज के फैसले लेती है। उन्होंने कहा कि पल्मोनोलॉजी, जो पहले TB और रेस्पिरेटरी मेडिसिन तक ही सीमित थी, अब स्लीप मेडिसिन, क्रिटिकल केयर और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी जैसे खास डिपार्टमेंट में फैल गई है। उन्होंने कहा कि वे स्लीप स्टडीज़, स्लीप एपनिया और खर्राटों जैसी समस्याओं के लिए C-PAP ट्रीटमेंट और निमोनिया, H1N1, COVID और रेस्पिरेटरी फेलियर जैसी इमरजेंसी में वेंटिलेटर-बेस्ड ट्रीटमेंट दे रहे हैं। नए लॉन्च किए गए इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सुइट में ICU के मरीज़ों से ब्रोंकोस्कोपी के ज़रिए सैंपल इकट्ठा करने और चार से छह घंटे के अंदर बायोफायर टेस्ट के ज़रिए इंफेक्शन फैलाने वाले एजेंट की पहचान करने की सुविधा है। इससे सही एंटीबायोटिक इलाज तुरंत शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि फेफड़ों के कैंसर के डायग्नोसिस के लिए, एंडो ब्रोंकोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EBUS) और रेडियल EBUS टेक्नीक का इस्तेमाल करके ट्यूमर से माइक्रोस्कोपिक सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ROSE (रैपिड ऑन साइट इवैल्यूएशन) तरीके से प्राइमरी कैंसर डायग्नोसिस, जिसमें आमतौर पर पांच से सात दिन लगते हैं, अब सिर्फ 20 से 30 मिनट में पूरा हो रहा है। उन्होंने बताया कि जीन प्रोफाइलिंग (NGS) के जरिए कैंसर से जुड़े जेनेटिक बदलावों की पहचान की जाती है और टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के चुनाव के लिए जरूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के जरिए ब्रोंकाइटिस में ट्यूमर को हटाना, बाहरी चीजों को निकालना और थोरैकोस्कोपी के जरिए फेफड़ों में पानी या मवाद होने पर बायोप्सी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्थमा की गंभीरता का पता लगाने के लिए PFT और फीनो टेस्ट किए जाते हैं और जिन्हें जरूरत है, उन्हें बायोलॉजिकल थेरेपी भी दी जा रही है। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि मेडिकल सेवाओं के साथ-साथ एकेडमिक और टीचिंग प्रोग्राम को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी तीन DNB सीटें और तीन DNB रेजिडेंट हैं और राज्य में पहली बार हम पोस्ट-MD डॉक्टरों के लिए इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी फेलोशिप दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस फेलोशिप में दो डॉक्टर EBUS और थोरैकोस्कोपी जैसे एडवांस्ड प्रोसीजर में स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी डिपार्टमेंट में चार कंसल्टेंट, एक रजिस्ट्रार, तीन रेजिडेंट और दो पोस्ट-MD फेलो की टीम लगातार सर्विस दे रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए नेशनल लेवल ब्रोंकोकॉन कॉन्फ्रेंस में उनके डिपार्टमेंट से प्रेजेंटेशन के लिए 14 पोस्टर और एक रिसर्च पेपर चुने गए थे, और यह गर्व की बात है कि उनके रेजिडेंट ने नेशनल लेवल पर दूसरा और तीसरा प्राइज जीता।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में 10,000 से ज़्यादा रूटीन ब्रोंकोस्कोपी की गई हैं और साल 2025-26 में ही करीब तीन हज़ार ब्रोंकोस्कोपी पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 1,500 से ज़्यादा कॉन्वेक्स EBUS, 1,000 से ज़्यादा रेडियल EBUS, 300 से ज़्यादा थोरैकोस्कोपी, 25 से ज़्यादा रिजिड ब्रोंकोस्कोपी, और करीब 20 फॉरेन बॉडी रिमूवल प्रोसीजर सफलतापूर्वक किए गए हैं। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सिर्फ़ OP सर्विस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑपरेशन थिएटर और एनेस्थीसिया बैकअप वाला एक स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट मेडिकल डिपार्टमेंट है। उन्होंने साफ़ किया कि मेडिकवर में बनाए गए इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सुइट के ज़रिए, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से वर्ल्ड-क्लास मेडिकल सर्विस दी जा रही हैं। इस मीडिया कॉन्फ्रेंस में डॉ. सुधीर, डॉ. मोनिशा, डॉ. सत्यपद्मजा, सेंटर हेड अरुण कुमार और दूसरे लोग शामिल हुए।

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