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भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन: 'मेक इन इंडिया' की एक बड़ी उपलब्धि*

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विशाखापत्तनम विशाखापत्तनम दर्पण समाचार 21 जून 2026 हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन, टिकाऊ और आत्मनिर्भर रेलवे टेक्नोलॉजी की दिशा में भारत की यात्रा का एक अहम पड़ाव है। भारतीय इंजीनियरों द्वारा भारत में ही सोची-समझी, डिज़ाइन की गई, इंजीनियर की गई और बनाई गई यह परियोजना, देश की उस बढ़ती क्षमता का शानदार उदाहरण है जिसके ज़रिए वह अपनी विशेषज्ञता और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके जटिल और वर्ल्ड-क्लास रेलवे सिस्टम विकसित कर सकता है।

पूरे सिस्टम का डिज़ाइन और इंटीग्रेशन देश के भीतर ही किया गया है, और इसके डिज़ाइन को 'रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन' (RDSO) से मंज़ूरी मिली है। इस परियोजना को भारत में सभी ज़रूरी रेगुलेटरी मंज़ूरियां भी मिल गई हैं, जिसमें हाइड्रोजन हैंडलिंग और उससे जुड़े ज़मीनी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 'पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइज़ेशन' (PESO) की मंज़ूरी भी शामिल है, जिससे सुरक्षा और भरोसे के उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित होता है।


इस परियोजना की एक अहम खासियत अहम सिस्टम में स्वदेशी टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल है। प्रोपल्शन सिस्टम, जिसमें ट्रैक्शन कन्वर्टर, बूस्ट कन्वर्टर और ह्यूमन-मशीन इंटरफेस (HMI) शामिल हैं, को भारत में ही डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर किया गया है। हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और अन्य मॉनिटरिंग सेंसर जैसे ज़रूरी सुरक्षा उपकरण, साथ ही हाइड्रोजन कंप्रेसर भी स्वदेशी हैं, जो एडवांस्ड हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।


कॉन्सेप्ट डेवलपमेंट और डिटेल्ड इंजीनियरिंग से लेकर रेगुलेटरी मंज़ूरी, मैन्युफैक्चरिंग, सिस्टम इंटीग्रेशन और वैलिडेशन तक, हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन के हर अहम पहलू को भारत में ही पूरा किया गया है। यह उपलब्धि न केवल अत्याधुनिक हाइड्रोजन-संचालित रेलवे टेक्नोलॉजी विकसित करने की भारत की क्षमता को दिखाती है, बल्कि "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" के विज़न के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी मज़बूत करती है। उम्मीद है कि यह परियोजना भविष्य में साफ़-सुथरे, ग्रीन और ऊर्जा-कुशल रेल ट्रांसपोर्ट को अपनाने के लिए एक मज़बूत आधार बनेगी, साथ ही ग्लोबल मंच पर भारत की तकनीकी उत्कृष्टता को भी दिखाएगी।

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