ठंडी और ऊबड़-खाबड़ ऊंचाई पर,
वे दिन-रात हमारे लिए खड़े रहे।
मज़बूत हाथों और इतने हिम्मत वाले दिलों से,
उन्होंने हिम्मत की कहानी सोने पर लिखी।
बर्फीली हवाएं चलने लगीं,
छिपे हुए, चौकन्ने दुश्मन के खिलाफ।
उन्होंने पलकें नहीं झपकाईं, वे डरे नहीं,
हमारी मातृभूमि को इतना प्यारा बनाए रखने के लिए।
उन्होंने हमारे कल के लिए अपना आज दे दिया,
और हमारे दिलों को गर्व और दुख में छोड़ गए।
हम आसमान में ऊंचा झंडा लहराते हैं,
और उनकी तारीफ़ गाते हैं जो कभी नहीं मरेगा।
के.वी. शर्मा
संपादक
विशाखा संदेशम और
विशाखापत्तनम दर्पण
समाचार पत्रिका
विशाखापत्तनम
सेल नंबर 7075408286

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