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जीवन सत्य है।

 


ज़िंदगी की सबसे कीमती चीज़ एक हेल्दी शरीर है जो खुद खड़ा हो सके और चल सके।

बिस्तर पर रहने के बाद ही इस सच्चाई को समझने की गलती न करें।

ज़िंदगी की सबसे कीमती चीज़ एक हेल्दी शरीर है जो खुद खड़ा हो सके और चल सके।

मैं आपको एक कड़वा सच बताता हूँ। बुढ़ापे में आपकी खुशी सिर्फ़ एक चीज़ पर निर्भर करती है।

आप कितने साल बिस्तर से उठकर खुद टॉयलेट जा सकते हैं, यही आपकी असली दौलत है।

एक बार जब आप बिस्तर पर आ जाते हैं, तो आप पहले जैसे 'आप' नहीं रह जाते। आप एक बोझ बन जाते हैं जो सिर्फ़ साँस लेता है।

आप किस पर निर्भर हैं? बच्चों पर? देखभाल करने वालों पर? मदद करने वालों पर? कोई भी आपसे उतना प्यार नहीं कर सकता जितना आप खुद से करते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि अस्सी साल की उम्र में हमारी हालत कैसी होगी? जब हम सुबह उठेंगे, तो क्या हमारे हाथ-पैर तब भी हमारी बात मानेंगे?

क्या बिस्तर से बाथरूम तक कुछ कदम चलने पर भी हमारी साँस फूल जाएगी? या हम आसानी से चल पाएंगे?

जब वह दिन आएगा, तभी एक सच पूरी तरह समझ में आएगा। हमारी इज़्ज़त, आज़ादी, फ़ैसले और यहाँ तक कि हमारी भावनाएँ भी एक ऐसे शरीर पर निर्भर करती हैं जो हिल-डुल सके।

अगर आप खुद शौच कर सकते हैं, तो आपको किसी और की मदद का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। आपकी निजी इज़्ज़त भी बनी रहेगी।

अगर आप खुद एक गिलास पानी ले सकते हैं, तो आपको प्यास से किसी और के आने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।

अगर आप खिड़की तक जाकर बाहर की दुनिया देख सकते हैं, तो आपको छत को घूरकर समय नहीं गिनना पड़ेगा।

तब एक सच आपको साफ़ हो जाएगा। पैसा बहुत ज़रूरी है। लेकिन इससे सच्चा प्यार नहीं खरीदा जा सकता। यह आपको सुबह तीन बजे शौच करने की ताकत भी नहीं देता।

बच्चों का प्यार बहुत कीमती होता है। लेकिन उनकी भी अपनी ज़िंदगी होती है—घर के कर्ज़, बच्चों की ज़िम्मेदारियाँ और नौकरी का दबाव।

अगर वे आपसे मिलने के लिए समय निकालते हैं, तो यह भी उनकी तरफ़ से एक बड़ी कोशिश है। उन्हें गलत न समझें।

इसलिए, आज से ही अपने शरीर को सबसे वफ़ादार दोस्त समझें जो ज़िंदगी भर आपके साथ रहेगा।

इसका ध्यान रखने का मतलब है एक्सरसाइज़ करना। अपने शरीर को नज़रअंदाज़ करने का मतलब है यह कामना करना कि काश बिस्तर पर आराम करने के दिन जल्दी आ जाएं।

बैलेंस्ड डाइट खाएं, अच्छी नींद लें। आज की चिंताओं को आज ही खत्म करें। शांति से बैठें।

यही प्रेरणा है कि आज ही एक्शन लें, भविष्य की चिंता किए बिना, अपने शरीर को मज़बूत करें, सेहत बनाए रखें और अपने मन को शांत रखें।

बुढ़ापे में आप खुद को जो सबसे बड़ा तोहफ़ा दे सकते हैं, वह बैंक में जमा पैसे नहीं, बड़ा घर नहीं है।

एक ऐसा शरीर जो चल सके, धूप का मज़ा लेने की ताकत, ठंडी हवा महसूस करने की सेहत और फूलों के खिलने का मज़ा लेने के लिए शांत मन। के.वी.शर्मा लेखक और एडिटर विशाखा संदेशम और विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी न्यूज़ पेपर विशाखापत्तनम

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