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सेंट जोसेफ महिला महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी सम्मेलन का शुभारंभ “कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव सृजनात्मकता का विकल्प नहीं” — पद्मभूषण प्रो. वाई. लक्ष्मी प्रसाद

 


विशाखापट्टनम, 7 जुलाई। ज्ञानापुरम स्थित सेंट जोसेफ महिला महाविद्यालय (स्वायत्त) में “भाषा एवं साहित्य के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी सम्मेलन का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सिस्टर शैजी पी. डी. की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह में पद्मभूषण, विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रो. वाई. लक्ष्मी प्रसाद ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन का उद्घाटन किया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।


मुख्य अतिथि प्रो. लक्ष्मी प्रसाद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानव सृजनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि भाषाओं, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने तकनीक के नैतिक एवं उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग पर बल देते हुए कहा कि भाषाई विविधता और साहित्यिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस समसामयिक विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए प्राचार्या डॉ. सिस्टर शैजी, सम्मेलन संयोजिका डॉ. पी. के. जयलक्ष्मी तथा भाषा विभाग के सभी शिक्षकों को बधाई दी।

विशाखापट्टनम के डॉ. वी. एस. कृष्णा सरकारी डिग्री एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय (स्वायत्त) के प्राचार्य डॉ. आई. विजय बाबू ने कहा कि यह सम्मेलन भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर सार्थक विमर्श का उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा।


सिएटल (अमेरिका) स्थित Trace.AI की वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर यामिनी के. ने अपने मुख्य व्याख्यान में भाषा प्रौद्योगिकी, शिक्षा, अनुसंधान, अनुवाद तथा साहित्य अध्ययन में एआई की व्यापक संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

राजमहेंद्रवरम स्थित गोदावरी ग्लोबल विश्वविद्यालय के प्रो. टी. सत्यनारायण ने कहा कि भाषा शिक्षण, अधिगम एवं शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए, किंतु मानव सृजनात्मकता और मौलिकता की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।


महाविद्यालय की उप-प्राचार्या डॉ. सिस्टर हेमा ने स्वागत भाषण में बताया कि सम्मेलन तेलुगु, हिंदी, संस्कृत, फ्रेंच और अंग्रेज़ी—इन पाँच भाषाओं में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका सहित अनेक देशों से साहित्यकार, शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं विद्वान भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में 100 से अधिक प्रतिनिधियों की सहभागिता दर्ज की गई।

सम्मेलन संयोजिका एवं पूर्व द्वितीय भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. पी. के. जयलक्ष्मी ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य भाषा और साहित्य पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव का विश्लेषण करना, इसके अवसरों एवं चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना तथा इसके उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करना है।


इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. सिस्टर शैजी ने मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषा विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) शोध-संचिका ‘शोध समालोचन’ तथा वर्ष 2005 से निरंतर प्रकाशित हिंदी पत्रिका ‘प्रतिभा’ के 19वें अंक का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया।

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