*सब अपने हैं*
*यह सोचना कितना गलत है*
*सब हमारे जैसे हैं*
*यह सोचना भी उतना ही गलत है।*
*कुछ हमारी ज़िंदगी में ज़रूरत के लिए आते हैं*
*कुछ मौके के लिए आते हैं।*
*कुछ इसे देखते हैं*
*वे हमें बेइज्जत करने आते हैं।*
*यहाँ 100% प्यार जैसी कोई चीज़ नहीं है।*
*सारे रिश्ते नाते दूध और घी जैसे मिलावटी हो गए हैं*
* जो बचे हुए हैँ अब वो भी वैसे ही हो रहे हैं।*
*ये लोग भी मिलावटी हैं*
*बड़े लोग, मिलावटी प्यार।*
*दिखावटी लोग, दिखावटी व्यवहार..
* किस पर करे विस्वास,
* ज़ब अपनों से ही नहीं रही आस.*
* मतलब का प्यार, मतलबी यार....
* अब तो भोले बाबा ही लगाएंगे बेडा पार.....
Written and Edited by R.D.Bajpai Jd News Vision News paper Lucknow.UP.

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