तेलुगु धरती कांप उठी,
देश का दिल नहीं झुका!
'कृत या मार' के नारे के साथ,
एक नया इतिहास लिखा गया!
8 अगस्त की रात,
गांधी का आह्वान लेकर,
गोरे अभिजात वर्ग के शासन को काट डालो,
आवाजों का हुजूम गरजा! [1]
"भारत छोड़ो! देश छोड़ो!"
गुलामी की बेड़ियां टूट गईं।
जेल की दीवारें टूट गईं,
युवाओं का खून बह निकला! [1]
आजादी हमारी जान है,
इस पर कदम रखने वाले वीरों का यह बलिदान है।
यह धरती हमारी है, यह उम्मीद हमारी है,
भारत माता की जय! [1]
के.वी.शर्मा द्वारा लिखित कविता संपादक विशाखा संदेशम और विशाखापट्नम दर्पण हिंदी समाचार पत्र विशाखापट्नम

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