सावन का बादल
आसमान में काले बादल छाए,
ठंडी हवा चली!
बिजली ने रास्ता दिखाया,
गरज के साथ गरजे!
वन की माँ मानसून की बारिश के
आने का इंतज़ार करती रही,
और रिमझिम फुहारों के साथ,
धरनी रोमांचित और खुश थी।
खेतों में फसलें हरी थीं,
और नदियाँ और झरने बह रहे थे!
थके हुए दिल में खुशी लाकर,
वो ज़िंदगी की प्यास बुझाने आया!
डॉ. कमल बैद सोशल वर्कर और एग्जीक्यूटिव एडिटर विशाखापत्तनम दर्पण हिंदी समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम

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