कीचड़ में इंसान के अवशेष.. ये मरे हुए लोगों के अवशेष हैं!”
“क्या मरने के बाद भी शांति नहीं है..? कीचड़ में मिले मुर्दों का दर्द!”
ज़िंदा रहते हुए इंसान.. मरने के बाद लाश.. लेकिन इज़्ज़त तो होनी ही चाहिए।
अगर कब्रिस्तान में दफ़नाए गए शरीरों की भी सुरक्षा नहीं है, जो कि आखिरी पड़ाव है.. तो मरने के बाद भी शांति कहाँ है?
कीचड़ से निकलते हुए इंसानी खोपड़ियाँ.. हड्डियाँ.. शरीर के अवशेष कई सवाल खड़े करते हैं।
कल तक, वे किसी के पिता हो सकते थे.. किसी की माँ हो सकते थे.. किसी के भाई हो सकते थे.. किसी की बहन हो सकते थे..
आज वे कीचड़ में अनजान हड्डियों के रूप में क्यों मिलें?
उन परिवारों के लिए जिन्होंने अपने प्रियजनों को आखिरी सांस के बाद आंसुओं के साथ विदा किया..
कितना भयानक दर्द होता है अगर उनकी कब्रें भी सुरक्षित न हों?
यह घटना ऐसे हुई जैसे लाशें चिल्ला रही हों, “हमारी कब्रों की रक्षा करो.. हमारी अस्थियों को इस तरह मिट्टी में मत मिलाओ।”
डेवलपमेंट और मलबा हटाने के नाम पर कब्रिस्तानों, कब्रों और दफ़न लाशों को घूमने वाली मशीनों से खोदना कितना सही है?
अगर मिट्टी खोदने में कोई रुकावट नहीं है.. तो आखिर में इंसानी कब्र के लिए मिट्टी का एक बेबस ढेर ही बचता है?
क्या मिट्टी और मलबा हटाने के पीछे नियमों का पालन किया गया है? क्या अधिकारी जांच करेंगे? सवाल अब बहुत ज़रूरी हैं।
एक तरफ ज़िंदा लोगों की सुरक्षा.. और दूसरी तरफ मरे हुए लोगों की इज़्ज़त.. सबकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सिस्टम की है।
यह घटना सिर्फ़ एक ऐसी घटना नहीं है जहाँ इंसानी अस्थियाँ मिलीं..
“क्या मरने के बाद भी इंसान को कम से कम इज़्ज़त मिलती है?” यह सवाल समाज के सामने है।
Translated from telugu and Collected by K.V.Sharma EDITOR




Comments
Post a Comment