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"मन - जीवन"(एक कल्पिनक कहानी)


मन विचारों का एक कलेक्शन है”,कपड़ा धागों का एक कलेक्शन है।”एक अकेला धागा कपड़ा नहीं बनता।एक सुंदर कपड़ा तभी बनता है जब कई धागों को सब्र, देखभाल और सिस्टमैटिक तरीके से एक साथ बुना जाता है।इसी तरह, हमारी ज़िंदगी भी उन विचारों से बनती है जो हम हर दिन अपने मन में बुनते हैं!!...यद्भव तद्भवति"* हमारे विचार हमारा भविष्य बनाते हैं।

जब मन प्यार, विश्वास, आभार, दया और सेवा जैसे मीठे विचारों से भर जाता है, तो हमारी ज़िंदगी पवित्रता, शांति और खुशी से खिल उठती है।
अगर हम मन में गुस्सा, जलन, डर और नफ़रत जैसी नेगेटिव भावनाओं को जगह देते हैं, तो अंदर की शांति धीरे-धीरे गायब हो जाती है।
हमारी ज़िंदगी को बुनने वाला हर विचार एक धागे की तरह है।
*हर शब्द एक गाँठ की तरह है।*
*हर काम एक बुनाई की तरह है*। *ये तीनों मिलकर हमारे इतिहास का ताना-बाना बुनते हैं।*

*एक दिव्य संदेश:*
कभी भी एक भी अच्छे विचार को छोटा मत समझो।
कभी भी एक भी प्यार भरे शब्द को कम मत समझो।
कभी भी एक भी निस्वार्थ सेवा को बेकार मत समझो।
अगर हम हर अच्छे विचार, हर अच्छे काम और हर सेवा को अपनी ज़िंदगी में बुन लें, तो एक दिन हमारा इतिहास हमारी बनाई हुई सबसे खूबसूरत कला बन जाएगा।
मन को शुद्ध करना ही असली साधना है।
जब विचार शुद्ध होते हैं, तो शब्द मीठे हो जाते हैं, जब शब्द मीठे हो जाते हैं, तो कर्म शुद्ध हो जाते हैं, और जब कर्म शुद्ध हो जाते हैं, तो जीवन दिव्यता की ओर बढ़ता है।

हर दिन मन के करघे पर, हमें प्रेम को धागे, सेवा को बाने और सत्य को आधार बनाकर दिव्यता का महान ताना-बाना बुनना चाहिए। अगर हमारे विचार शुद्ध हो जाते हैं, तो हमारा जीवन शुद्ध हो जाता है।

*अगर हमारा जीवन शुद्ध है - तो हमारे आस-पास की दुनिया भी शुद्ध होगी।*

             कहानी संपादक के.वी. शर्मा द्वारा रचित

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