रेलवे के पानी में ‘मल’ वाला बैक्टीरिया, नई दिल्ली-हावड़ा समेत बड़े स्टेशनों की CAG रिपोर्ट ने खोली पोल
नई दिल्ली/विशाखापत्तनम :विशाखापत्तनम दर्पण: समाचारभारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है और रोजाना करोड़ों यात्री इसमें सफर करते हैं। सफर के दौरान प्यास लगने पर रेलवे स्टेशनों पर लगे वाटर कूलर का पानी पीना एक आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो पानी आप पी रहे हैं, वह आपके स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसे जानकर आप रेलवे स्टेशन का पानी पीने से पहले सौ बार सोचेंगे। 12 अगस्त को संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी में इंसान के मल में पाया जाने वाला खतरनाक ‘ई.कोलाई’ (E.coli) बैक्टीरिया मिला है। इस खुलासे ने रेलवे के स्वच्छता दावों की पोल खोलकर रख दी है।
इन प्रमुख स्टेशनों के पानी में मिला बैक्टीरिया
सीएजी की ओर से ‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में रेलवे की घोर लापरवाही को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला के साथ-साथ पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर से पानी के नमूने लिए गए थे। इन सभी जगहों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। चिंता की बात यह है कि साल 2022-23 के दौरान आठ जोन के करीब 49 और 2023-24 में 56 स्टेशनों के पानी में भी यह जानलेवा बैक्टीरिया पाया गया था।
रेल मंत्रालय के मानकों पर फेल हुए 458 स्टेशन
रेल मंत्रालय द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए जो कड़े मानक और दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, रेलवे के विभिन्न जोन उनका पालन करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। सीएजी के ऑडिट में यह बात सामने आई है कि 512 स्टेशनों की गहन जांच करने पर उनमें से 458 स्टेशन रेलवे बोर्ड की गाइडलाइंस पर खरे नहीं उतरे। इन स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (MEA) या तो सिरे से नदारद थीं या फिर तय मानकों से बहुत कम थीं। पीने के साफ पानी की कमी के साथ-साथ शौचालयों में भी भयंकर गंदगी पाई गई है, जो सीधे तौर पर यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ है।
नई दिल्ली और हावड़ा जैसे वीआईपी स्टेशनों का भी बुरा हाल
सिर्फ छोटे स्टेशन ही नहीं, बल्कि देश के सबसे व्यस्त और NSG-1 कैटेगरी में आने वाले वीआईपी स्टेशनों का हाल भी बेहाल है। रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली, सियालदह, हावड़ा, मुंबई सेंट्रल और सीएसएमटी जैसे बड़े स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्रियों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन बड़े स्टेशनों पर कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड जैसी बुनियादी चीजों का भारी अभाव है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि पीने के पानी के नल, पंखे, वॉटर कूलर और जरूरी साइनबोर्ड जैसी आवश्यक सुविधाओं में भी कई स्टेशनों पर भारी कमियां हैं।
सीएजी ने दिए सुधार के सख्त निर्देश
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में केवल रेलवे की खामियों को ही उजागर नहीं किया है, बल्कि व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त सिफारिशें भी की हैं। सीएजी ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वाटर सप्लाई सिस्टम की नियमित जांच की जाए और ‘यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल’ के तहत पीने के पानी की गुणवत्ता की पूरी टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए, जिसमें सभी जरूरी पैरामीटर शामिल हों। इसके साथ ही स्टेशनों पर स्वच्छता बनाए रखने और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े अन्य मापदंडों पर भी गंभीरता से ध्यान देने को कहा गया है।
K.V SHARMA EDITOR

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