Skip to main content

विश्वकर्मा जयंती 2026: कैसे शुरू हुई विश्वकर्मा पूजा की परंपरा? जानें भगवान विश्वकर्मा के जन्म और पौराणिक कथा की कहानी


विशाखापत्तनम /नई दिल्ली (विशाखापत्तनम दर्पण समाचार ): इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। विश्वकर्मा पूजा के दौरान सबसे खास होता है- मशीनों पर स्वस्तिक बनाना। क्या आप जानते हैं कि मशीनों पर स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है और इसके अलावा और क्या-क्या बनाया जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं और इसके महत्व पर भी प्रकाश डालते हैं।

विश्वकर्मा पूजन के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक महत्व है। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को सबसे पवित्र और शुभ चिन्ह माना गया है। स्वस्तिक शब्द ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘शुभ होना’ या ‘कल्याण होना’। किसी भी शुभ काम की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर ही की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों पर रोली, कुमकुम और सिंदूर से स्वस्तिक बनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं। पहला कारण यह है कि स्वस्तिक को भगवान श्री गणेश का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं और विघ्नहर्ता हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से मशीन के काम में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है और काम बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

दूसरा कारण समृद्धि से जुड़ा है। स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जहां स्वस्तिक होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से कारोबार में वृद्धि होती है और आर्थिक समृद्धि आती है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा है। कारीगर और मजदूर दिन भर मशीनों पर काम करते हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाकर वे अपनी सुरक्षा और मशीन की लंबी उम्र की कामना करते हैं ताकि पूरे साल कोई दुर्घटना न हो।

स्वस्तिक के अलावा भी विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों और औजारों पर कई तरह के शुभ चिन्ह बनाए जाते हैं। इसमें से एक ॐ का निशान है। कई जगह मशीनों पर ॐ लिखा जाता है। ॐ को ब्रह्मांड की ध्वनि और सृष्टि की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे बनाने से मशीन में दैवीय शक्ति का वास होता है।

वहीं, दूसरी जगह शुभ-लाभ भी लिखा जाता है। ये मशीनों, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन और मुख्य गेट पर शुभ और लाभ लिखा जाता है। इसका अर्थ होता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से काम शुभ हो और उसमें लाभ हो। यह व्यापार में बरकत के लिए लिखा जाता है।

विश्वकर्मा पूजन के दौरान कई लोग कलावा या मौली भी बांधते है और पूजा के बाद मशीनों के हैंडल, स्विच और औजारों पर लाल रंग का कलावा या रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इसे रक्षा कवच के रूप में देखा जाता है। इसके साथ ही मान्यता है कि कलावा बांधने से मशीन बुरी नजर से बची रहती है।

विश्वकर्मा पूजन के दौरान मशीनों पर तिलक और फूल-माला चढ़ाया जाता है। कारीगर सभी मशीनों को अच्छे से साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद गेंदे या अन्य के फूलों की माला पहनाई जाती है। कई फैक्ट्रियों में मशीनों को नए कपड़े की तरह सजाया भी जाता है। साथ ही कुछ जगहों पर मशीनों पर हाथ की पांचों उंगलियों से रोली और चावल के छापे भी लगाए जाते हैं, जो मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक होता है।

                    के.वी.शर्मा सम्पदक


Comments

Popular posts from this blog

स्वतंत्रता दिवस परेड में पूर्व सैनिकों ने बढ़ाया गौरव फुल ड्रेस रिहर्सल में 22 त्रि-सेवा पूर्व सैनिकों ने दिखाया अनुशासन और जज्बा |

.  Dr Raghawendra Mishra Excutive EDITOR   विशाखापत्तनम। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली परेड की तैयारियों के तहत पुलिस बैरक मैदान में फुल एवं फाइनल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया गया। रिहर्सल का निरीक्षण विशाखापत्तनम के पुलिस आयुक्त डॉ. शंखब्रत बागची, आईपीएस ने किया। रिहर्सल के दौरान 22 त्रि-सेवा पूर्व सैनिकों ने पूरे जोश, अनुशासन और उत्साह के साथ परेड में हिस्सा लिया। पूर्व सैनिकों की शानदार वेशभूषा, अनुशासित टर्नआउट और प्रभावशाली भागीदारी ने मैदान में मौजूद लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। परेड समाप्त होने के बाद पुलिस आयुक्त स्वयं अपनी टीम के साथ पूर्व सैनिकों की प्लाटून के पास पहुंचे और उनकी वेशभूषा, अनुशासन एवं शानदार प्रदर्शन की सराहना की। इस दौरान पुलिस आयुक्त और एक महिला आईपीएस अधिकारी ने पूर्व सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा— “आप लोगों के आने से परेड की शान बढ़ गई।” पुलिस अधिकारियों के इन उत्साहवर्धक शब्दों से पूर्व सैनिकों में खुशी और गर्व की भावना देखने को मिली। पूर्व सैनिकों ने कहा कि देशसेवा की भावना वर्दी उतरने के बाद भी समाप्त नहीं होती। राष्ट्र...

नगर के जाने-माने समाज सेवक एवं दानदाता डॉ कमल बैद जी को नेशनल मंडेला अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया!

विशाखापट्टनम: नगर के जाने-माने समाज सेवक दानदाता और गरीबों के मसीह कहलाने वाले डॉक्टर कमल बैदा जी को गोल्ड ईरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा नेशनल मंडेला अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया! यह पुरस्कार उनके प्रतिभा एवं गरीबों की सहायता को ध्यान में रखते हुए दिया गया है! मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं डॉ कमल जी को आगे और भी अधिक से अधिक पुरस्कारों के साथ सम्मानित किया जाना चाहिए!                              के ·वी· शर्मा                                संपादक