छोटे कृष्ण! आओ!
तुम्हारी हंसी अपनी चांदनी से तुम पर बरस जाए!
ओ तुम जो यशोदा को दुलारते हो,
ओ तुम जो गोपियों का दिल चुराते हो!
जब तुम अपना प्यारा रूप देखते हो,
तुम्हारी सारी परेशानियां बर्फ की तरह पिघल जाती हैं!
ओ बालगोपाल, जो अपनी मुरली से दुनिया को गाते हैं!
तुम हमारी रक्षा हो!
मेरे पैर झुनझुनी कर रहे हैं, मेरे पैर झुनझुनी कर रहे हैं,
जैसे मेरे हाथ में मक्खन पिघलता है,
तुम काले बालों के साथ चलते हो,
हमारे नंदन, बालगोपाल!
तुम्हारा शरीर नीले बादलों के रंग का है,
तुम अमर लोकों का प्यार हो,
तुम्हारे कदम हमारे दिलों को लाखों रोशनियों से भर दें!
बालकृष्ण, तीनों के हाथों का चुंबन,
तुम्हारी शरारती लीलाएं समझ से बाहर हैं!
भले ही तुम बर्तनों का मक्खन चुरा लो,
तुम्हारे होठों की मुस्कान गुस्सा दूर कर दे!
तुम्हारा छोटा सा मुँह जिसने ब्रह्मांड को दिखाया है,
परमेश्वर का नाम, जो जीवन के बंधन बांधता है,
गोपाल कृष्ण, गायों के रक्षक,
भगवान कृष्ण हम पर कृपा करें!
के.वी.शर्मा द्वारा रचित, एडिटर विशाखा संदेशम और विशाखापत्तनम दर्पण समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम सेल नंबर 7075408286

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